मुंबई: राज्यसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है। महाराष्ट्र में कुल 7 सीटों पर चुनाव होने हैं और महायुति गठबंधन अपनी 6 सीटों को लेकर काफी सहज दिख रहा है, लेकिन महाविकास अघाड़ी अपनी एक तय सीट को लेकर अंदरूनी खींचतान में फंस गई है। सारी कवायद इसी बात की है कि सूबे की इन 7 सीटों से दिल्ली कौन पहुंचेगा। आइए, महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनावों का पूरा गणित समझते हैं।
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बीजेपी की कोर कमेटी कर रही उम्मीदवारों पर मंथन
सत्ता पक्ष इन चुनावों में कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। बीजेपी की कोर कमेटी ‘सागर’ बंगले पर संभावित उम्मीदवारों पर मंथन कर रही है। संगठनात्मक निष्ठा और जातीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। विनोद तावड़े की सक्रिय राज्य राजनीति में वापसी की चर्चा जोरों पर है। उनके साथ विजया रहाटकर और रामदास अठावले के नाम भी सुर्खियों में हैं। शिंदे गुट की शिवसेना राहुल शेवाले के नाम पर झुकती दिख रही है। यहां वरिष्ठता से ज्यादा युवापन और काम के प्रदर्शन को तरजीह दी जा रही है। इससे गजानन कीर्तिकर जैसे वरिष्ठ नेताओं में असहजता साफ दिख रही है।
NCP की तरफ से राज्यसभा जा सकते हैं पार्थ पवार
बीजेपी नेता और महाराष्ट्र सरकार ने मंत्री आशीष शेलार ने राज्यसभा चुनावों में संभावित उम्मीदवारों के बारे में पूछे जाने पर कहा, 'नाम तय करना संसदीय बोर्ड और राष्ट्रीय अध्यक्ष का विशेषाधिकार है। महाराष्ट्र की कोर कमेटी नामों की सिफारिश कर सकती है, लेकिन अंतिम फैसला दिल्ली में होगा।' वहीं, NCP में पीढ़ी परिवर्तन की तस्वीर साफ नजर आ रही है। सुनेत्रा पवार के बारामती से चुनाव लड़ने के बाद पार्थ पवार का राज्यसभा में आने का रास्ता खुलता दिख रहा है। हालांकि पुरानी घटनाएं और हालिया राजनीतिक हलचल पार्टी की अंदरूनी चर्चाओं पर असर डाल रही हैं।
शरद पवार पर टिकी हैं सियासी पंडितों की निगाहें
शरद पवार खेमे की नजर अब अपने दिग्गज नेता के फैसले पर टिकी हुई है। क्या 85 साल के हो चुके शरद पवार एक और कार्यकाल चाहेंगे या नई पीढ़ी को मौका देंगे? इस बारे में NCP-SP विधायक रोहित पवार ने कहा, 'हमारी सामूहिक इच्छा है कि साहेब यानी शरद पवार राज्यसभा में हमारा प्रतिनिधित्व करें। उनके पास 60 साल का संसदीय अनुभव है। हम उनसे चुनाव लड़ने का अनुरोध करेंगे, लेकिन अंतिम निर्णय उन्हीं का होगा।' अंकगणित बिल्कुल साफ है और जीत के लिए 37 वोट जरूरी हैं। महाविकास अघाड़ी के पास 46 वोट हैं, इसलिए वह आसानी से जीत सकती है। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में ‘आसानी’ शब्द बहुत कम सुनाई देता है।
आदित्य ठाकरे ने भी ठोका सीट पर पार्टी का दावा
आदित्य ठाकरे ने खुलकर दावा किया है कि मौजूदा सरकार के खिलाफ सबसे मुखर आवाज उठाने के कारण यह सीट शिवसेना (UBT) की बनती है। अगर MVA के तीनों दल एक नाम पर सहमत नहीं होते, तो बीजेपी को मौका मिल सकता है और तय जीत भी सियासी घमासान में बदल सकती है। शिवसेना-UBT के विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा, 'हमारे सांसदों ने मुंबई की लूट और संविधान को कमजोर करने के खिलाफ सबसे बुलंद आवाज उठाई है। प्रदर्शन और राजनीतिक तर्क दोनों के आधार पर इस सीट पर हमारा दावा मजबूत है।'
'एमवीए की स्थिति एक अनार और सौ बीमार जैसी'
शिंदे शिवसेना और महायुति के नेता MVA की अंदरूनी खींचतान पर चुटकी ले रहे हैं। कैबिनेट मंत्री भारत गोगावाले ने कहा, 'एमवीए की स्थिति एक अनार सौ बीमार जैसी है। इनके चुनाव नजदीक आएंगे तो दरार और भी बढ़ेगी।' बता दें कि 26 फरवरी को चुनाव आयोग की अधिसूचना जारी होने वाली है। इसलिए सूबे की सियासत में सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। क्या विनोद तावड़े की वापसी होगी? क्या पार्थ पवार दादा शरद पवार के नक्शेकदम पर चलेंगे? और क्या महाविकास अघाड़ी एकजुट रह पाएगी? इन सारे सवालों के जवाब अब 16 मार्च को मिलेंगे।