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मेघालय में रेलवे प्रोजेक्ट के खिलाफ 6 मार्च को प्रोटेस्ट, निकाली जाएगी काले झंडे के साथ रैली

 Edited By: Shailendra Tiwari
 Published : Mar 03, 2025 11:36 pm IST,  Updated : Mar 03, 2025 11:36 pm IST

मेघायल में रेलवे प्रोजेक्ट को लेकर एक ग्रुप ने कहा है कि वह 6 मार्च को काले झंडे की रैली निकालेगी।

रेलवे- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : FILE PHOTO

शिलांग: मेघालय से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मेघायल के जयंतिया हिल्स क्षेत्र में प्रस्तावित रेलवे प्रोजेक्ट का जयंतिया नेशनल काउंसिल विरोध करेगा। विरोध स्वरूप जयंतिया नेशनल काउंसिल यानी जेएनसी 6 मार्च को काले झंडे दिखाएगा। इसकी जानकारी जयंतिया नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष संबोर्मी लिंगदोह ने दी है। उन्होंने कहा कि हमने सरकार को काफी समय पहले एक ज्ञापन सौंपा था जिसे सरकार की ओर अनदेखा किया जा रहा है और वह अभी भी लंबित है।

की जा रही बाहरी लोगों के न आने की मांग

उन्होंने अपनी बातों पर जोर देते हुए कहा कि जब तक पहाड़ियों पर बाहरी लोगों की आवाजाही को रोकने के लिए एक मजबूत सिस्टम नहीं बनाया जाता है तब तक यह रैली रेलवे के प्रति लोगों की नाराजगी को दिखाती रहेगी। लिंगदोह ने इस रैली में लोगों से भाग लेने का आग्रह किया और इसे क्षेत्र की बेहतरी के लिए जरूरी कदम बताया।

सालों से लटका है प्रोजेक्ट

इसी बीच मेघायल के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने खुलासा किया कि केंद्र सरकार ने राज्य से रुकी हुई बर्नीहाद-शिलांग रेलवे प्रोजेक्ट के लिए अलॉट किए गए धन को वापस करने का अनुरोध किया है। बता दें कि ऐसे दबाव के कारण साल 2016-17 से यह प्रोजेक्ट अब तक लटका पड़ा है।

मजबूत ढांचे की जरूरत पर बल

नव निर्वाचित खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (केएचएडीसी) के मुख्य कार्यकारी सदस्य (सीईएम) शेम्बोरलांग रिनजा ने कहा कि कार्यकारी समिति आधिकारिक रुख अपनाने से पहले केंद्र सरकार के प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगी। उन्होंने रेलवे विकास का समर्थन करने से पहले स्वदेशी खासी समुदाय की सुरक्षा के लिए एक मजबूत ढांचे की जरूरत पर बल दिया। 

इसी तरह, खासी जयंतिया गारो पीपुल फेडरेशन (एफकेजेजीपी) ने असम के चपरमुख जंक्शन से मेघालय के जोवाई तक प्रस्तावित 180 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का भी विरोध किया है। समूह ने जयंतिया हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (जेएचएडीसी) से अनुरोध किया है कि वह लोगों के आवाजाही संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए ठोस सिस्टम के बिना पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) को एनओसी जारी न करे, साथ ही उन्हें चेतावनी दी कि यह प्रोजेक्ट क्षेत्र की सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय अखंडता को खतरे में डाल सकती है।

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