Thursday, March 05, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. पैसा
  3. ऑटो
  4. गाड़ियों के नए नियमों पर बवाल! Hyundai और Tata की सरकार से शिकायत, Maruti को मिल रही छूट से बिगड़ रहा पूरा खेल

गाड़ियों के नए नियमों पर बवाल! Hyundai और Tata की सरकार से शिकायत, Maruti को मिल रही छूट से बिगड़ रहा पूरा खेल

Edited By: Shivendra Singh Published : Nov 29, 2025 08:07 am IST, Updated : Nov 29, 2025 08:07 am IST

भारत में ऑटो सेक्टर इन दिनों नए उत्सर्जन नियमों (Emission Rules) को लेकर घमासान के दौर से गुजर रहा है। देश की कई दिग्गज कार कंपनियों ने सरकार के प्रस्तावित वजन-आधारित इमीशन छूट पर खुलकर आपत्ति जता रही हैं।

Hyundai-Tata की सरकार से बड़ी...- India TV Paisa
Photo:CANVA Hyundai-Tata की सरकार से बड़ी मांग!

भारत के ऑटो सेक्टर में इन दिनों बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नए फ्यूल एफिशिएंसी नियमों को लेकर देश की दिग्गज कार कंपनियों हुंडई, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर ने सरकार के प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति उठाई है। इन कंपनियों का कहना है कि नए नियमों में छोटे और हल्के वाहनों को दी जा रही छूट सिर्फ एक कंपनी मारुति सुजुकी को फायदा पहुंचाएगी, जिससे पूरे उद्योग का संतुलन बिगड़ सकता है। यही वजह है कि नया नियम लागू होने से पहले ही ऑटो सेक्टर दो खेमों में बंट गया है।

क्या है पूरा मामला?

भारत में जल्द ही कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) के नए नियम लागू होने वाले हैं। इनमें कारों के औसत CO2 उत्सर्जन लक्ष्य को 113 ग्राम/किमी से घटाकर 91.7 ग्राम/किमी करने का प्रस्ताव है। ये टारगेट बड़े SUVs के लिए तो आसान हैं, लेकिन छोटे पेट्रोल वाहनों के लिए इन्हें पूरा करना कहीं ज्यादा मुश्किल होगा। इसी बीच सरकार ने 909 किलो या उससे कम वजन वाली, 1200cc तक की इंजन क्षमता और 4 मीटर से कम लंबाई वाली कारों को कुछ राहत देने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का तर्क है कि छोटी कारों में एफिशिएंसी बढ़ाने की संभावनाएं सीमित होती हैं, इसलिए इन्हें छूट देना जरूरी है।

हुंडई, टाटा क्यों भड़कीं?

एक रिपोर्ट के अनुसार, हुंडई, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर ने सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि वजन आधारित छूट सिर्फ एक कंपनी को फायदा पहुंचाती है। जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर का दावा है कि 909 किलो से कम वजन वाली 95% कारें सिर्फ मारुति सुजुकी ही निर्माता की हैं।महिंद्रा ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्पेशल कैटेगरी से न सिर्फ इंडस्ट्री का बैलेंस बिगड़ेगा, बल्कि देश के सुरक्षित और क्लीनर कारों के टारगेट पर भी असर पड़ेगा। हुंडई ने कहा है कि यह कदम इंटरनेशनल लेवल पर भारत की छवि को पीछे धकेल सकता है, क्योंकि दुनिया कड़े उत्सर्जन मानकों की ओर बढ़ रही है। इन कंपनियों का आरोप है कि अचानक ऐसा नियम लाने से भविष्य की तकनीक, निवेश और इलेक्ट्रिक वाहनों की दिशा प्रभावित होगी।

मारुति सुजुकी का पक्ष

मारुति सुजुकी का कहना है कि छोटी कारें बड़ी SUVs की तुलना में कहीं कम ईंधन खपत करती हैं और कम CO2 उत्सर्जन करती हैं। ऐसे में इन्हें सुरक्षा देना पर्यावरण और उपभोक्ता दोनों के लिए फायदेमंद है। कंपनी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में छोटी कारों को राहत दी जाती है।

नए नियम का फैसला अब अटका

नए नियमों को लेकर बढ़ती खींचातानी ने ऑटो सेक्टर में अनिश्चितता बढ़ा दी है। कंपनियों का कहना है कि जब तक नियम स्पष्ट नहीं होंगे, वे भविष्य की कारों खासतौर पर EVs में निवेश की रणनीति तय नहीं कर पाएंगी।

Latest Business News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Auto से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा

Advertisement
Advertisement
Advertisement