भारत का हर राज्य, हर शहर और हर गांव अपनी अलग पहचान और परंपराओं के लिए जाना जाता है। लेकिन महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित एक छोटा-सा गांव नांदूर निम्बा दैत्य अपनी अनोखी मान्यता के कारण पूरे देश का ध्यान खींच रहा है। इस गांव में न तो कोई मारुति कार खरीदता है, न चलाता है और न ही गांव की सीमा में मारुति ब्रांड की कोई गाड़ी देखी जाती है। वजह? एक ऐसी स्थानीय कथा, जिसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाए।
यहां लोगों की आस्था किसी आम धार्मिक परंपरा पर नहीं, बल्कि गांव के रक्षक देवता निम्बा दैत्य पर आधारित है। गांव के लोग मानते हैं कि सदियों पहले निम्बा दैत्य और भगवान हनुमान (जिन्हें मारुति भी कहा जाता है) के बीच एक बड़ा विवाद हुआ था। कथा के अनुसार, स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि भगवान राम को हस्तक्षेप करना पड़ा। कहा जाता है कि श्रीराम ने निम्बा दैत्य को गांव की रक्षा का अधिकार दिया और हनुमान को इस क्षेत्र से दूर रहने का निर्देश दिया। तभी से पूरे गांव में हनुमान नाम, उनकी पूजा और यहां तक कि मारुति कारें भी वर्जित हो गईं।
गांव में हनुमान मंदिर भी नहीं
गांव में कोई हनुमान मंदिर नहीं है। यहां तक कि बच्चे का नाम भी “मराठी” या “हनुमान” नहीं रखा जाता। गांव में यह मान्यता है कि हनुमान से जुड़ी कोई भी चीज गांव में प्रवेश करे तो दुर्भाग्य आता है और मारुति कार का नाम सीधे-सीधे इसी कारण से जुड़ा है। स्थानीय लोग एक कहानी अक्सर सुनाते हैं। कई साल पहले गांव के एक डॉक्टर ने मारुति 800 खरीदी थी। कार खरीदने के बाद अचानक उनके क्लिनिक में आने वाले मरीजों की संख्या घटने लगी। लगातार परेशानियों के बाद उन्होंने मारुति कार बेचकर टाटा सूमो खरीदी। लोगों का दावा है कि इसके बाद डॉक्टर का काम फिर से चलने लगा। इसी घटना ने गांव में मारुति कारों को लेकर अशुभ होने की मान्यता को और मजबूत कर दिया।
अन्य घटनाएं
कुछ और घटनाएं भी गांव में मशहूर हैं जैसे कि मारुति नाम वाले मजदूरों का बीमार पड़ जाना या मारुति कार का हॉर्न सुनना अपशकुन माना जाना। हालांकि यह धारणा केवल हनुमान से जुड़े नामों तक ही सीमित है। गांव वाले अन्य सभी देवी-देवताओं जैसे गणेश और कृष्ण की पूजा सामान्य रूप से करते हैं।



































