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एयर इंडिया ने पूंजी जुटाने के लिए सरकार से 2,400 करोड़ रुपए की गारंटी मांगी

वित्तीय संकट से गुजर रही एयर इंडिया ने नई पुंजी जुटाने के लिए सरकार से 2,400 करोड़ रुपए की गारंटी मांगी है।

India TV Business Desk India TV Business Desk
Updated on: December 12, 2019 6:47 IST
Air India - India TV Paisa

Air India 

नयी दिल्ली। वित्तीय संकट से गुजर रही एयर इंडिया ने नई पुंजी जुटाने के लिए सरकार से 2,400 करोड़ रुपए की गारंटी मांगी है। एयरलाइन मुख्य रूप से परिचालन जरूरतों को पूरा के लिए यह पूंजी जुटा रही है। यह बात ऐसे समय सामने आयी है जब सरकार कर्ज में डूबी एयर इंडिया के विनिवेश के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। ​अधिकारी ने कहा कि एयरलाइन ने परिचालन जरूरतों के लिये पूंजी जुटाने को लेकर सरकार से 2,400 करोड़ रुपए की गारंटी मांगी है। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने इस बारे में कोई भी टिप्पणी नहीं की। एयरलाइन को 2018-19 में 8,556.35 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा होने का अनुमान है। 

गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा था कि मार्च तक एअर इंडिया और भारत पेट्रोलियम के विनिवेश की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। सरकार एयर इंडिया को बेचने में आने वाली रुकावटों को दूर करने की कोशिशें कर रही है। सरकार ने बॉन्ड्स के जरिए भी 7985 करोड़ रुपए जुटाए। इस रकम का इस्तेमाल एअरलाइन के कर्ज को चुकाने के लिए किया जाएगा।

सरकार की योजना एयर इंडिया और इसकी लो-कॉस्ट इंटरनेशनल सब्सिडियरी एअर इंडिया एक्सप्रेस को बेचने की है। इसके साथ ही ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी एयर इंडिया सिंगापुर टर्मिनल सर्विसेज लिमिटेड (AISATS) में हिस्सेदारी बेची जाएगी। रीजनल एयरलाइन अलायंस एयर, इंजिनियरिंग सब्सिडियरी एअर इंडिया इंजिनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (AIESL) और ग्राउंड हैंडलिंग सब्सिडियरी एअर इंडिया एयर ट्रांसपॉर्ट लिमिटेड (AIATSL) को अलग से बेचा जाएगा।

15 दिसंबर को मंगाई जा सकती है निविदा

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया की बिक्री के लिए सरकार 15 दिसंबर को निविदा मंगा सकती है। एयर इंडिया में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने में विफल रहने के बाद सरकार इस बार अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रही है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, निजीकरण की प्रक्रिया के बीच एयर इंडिया ने अपने सभी कर्मचारियों को 1 साल की नौकरी की गारंटी दी है। रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया में इस समय 11 हजार से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं।

एअर इंडिया के सभी कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा

बीते 27 नवंबर को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में कहा था कि हजारों करोड़ रुपए के कर्ज के बोझ तले दबी सरकारी एयरलाइन एअर इंडिया का निजीकरण नहीं हो पाता है तो सरकार इसे पूरी तरह से बंद कर देगी। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय कैरियर, एयर इंडिया का निजीकरण नहीं होने की स्थिति में इसे बंद करना होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों के लिए एक अनुकूल सौदा सुनिश्चित किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि सरकार ने एयर इंडिया को लेकर एक वैकल्पिक तंत्र का गठन किया था। इसने एयर इंडिया को लेकर कुछ फैसले किए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए कुछ प्रक्रिया चल रही है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार एयर इंडिया के सभी कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखेगी। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया के निजीकरण या फिर बंद होने से किसी भी कर्मचारी का अहित नहीं होने दिया जाएगा।

बता दें कि एयर इंडिया पर 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। संसद से बाहर पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि यदि हम इसका निजीकरण नहीं करते हैं तो इसके संचालन के लिए हम धन कहां से लाएंगे।

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