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वित्त मंत्री रहते अरुण जेटली के कार्यकाल में हुए कई बड़े फैसले, ये रही पूरी जानकारी

 Written By: India TV Business Desk
 Published : Aug 24, 2019 03:03 pm IST,  Updated : Aug 25, 2019 02:20 pm IST

पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया। जेटली ने अरुण जेटली ने दोपहर 12.07 मिनट पर AIIMS में अंतिम सांस ली, वे 9 अगस्त से यहां भर्ती थे। भारतीय राजनीति में जेटली अपने पीछे कई यादें छोड़ गए हैं। 2014 में अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव हार जाने के बाद भी उन्हें पीएम मोदी ने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी थी।

Arun Jaitley passes away, 10 historic decisions as finance...- India TV Hindi
Arun Jaitley passes away, 10 historic decisions as finance minister of india

नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया। जेटली ने अरुण जेटली ने दोपहर 12.07 मिनट पर AIIMS में अंतिम सांस ली, वे 9 अगस्त से यहां भर्ती थे। भारतीय राजनीति में जेटली अपने पीछे कई यादें छोड़ गए हैं। 2014 में अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव हार जाने के बाद भी उन्हें पीएम मोदी ने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी थी। 
 

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वित्त मंत्री रहते हुए जेटली ने देश की अर्थव्यवस्था, भ्रष्टाचार, कालाधन, नोटबंदी, जीएसटी, डिजिटल ट्रांजेक्शन, एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा में कई बैंकों का विलय जैसे कई बड़े फैसले लिए थे। नोटबंदी और जीएसटी (GST) जैसा बड़ा फैसला सबसे प्रमुख है। आप भी जानिए पेशे से सफल वकील जेटली से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों के बारे में।
 

वित्त मंत्री रहते अरुण जेटली ने लिए थे ये बड़े फैसले

  1. देश में जीएसटी के रूप में 'एक देश, एक कर' देने में जेटली ने अहम भूमिका महत्‍वपूर्ण थी। अरुण जेटली ने वित्त मंत्री के तौर पर GST को लागू किया। पूरे देश में 1 जुलाई 2017 को आधी रात से जीएसटी लागू हो गया था।। इस दिन से देश भर में चल रहे 17 टैक्स और 26 सेस खत्म हो गए थे। जीएसटी काउंसिल ने देश भर में पांच स्लैब लगाए थे, जिनके हिसाब से ही लोगों को टैक्स देना शुरू किया था। केवल पेट्रोल-डीजल, तंबाकू उत्पाद, शराब, रसोई गैस सिलेंडर जैसी वस्तुओं को छोड़कर के बाकी सभी को इसके दायरे में लाया गया था।  
  2. वहीं वस्तुओं के एक राज्य से दूसरे राज्य में लाने-जाने के लिए ई-वे बिल एक अप्रैल 2018 से लागू किया गया था। इससे कारोबारियों को सामान ले जाने पर राज्यों के नाके पर चेकिंग कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
  3. जेटली की अध्यक्षता में ही एसबीआई में सहयोगी बैंकों व भारतीय महिला बैंक का विलय हुआ था। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक का विलय किया गया था।   
  4. कर्ज न चुकाने वाले बकाएदारों से निर्धारित समय के अंदर बकाए की वसूली के लिए अरुण जेटली इनसॉल्वेंसी एवं बैंकरप्सी कोड (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) लेकर आए। सर्वप्रथम यह बिल 21 दिसंबर 2015 को प्रकाशित हुआ था। लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद 28 मई 2016 को यह बिल लागू हुआ था। इस बिल के लागू होने के बाद बैंकों और अन्य लेनदारों को दिवालिया कंपनियों से वसूली में मदद मिल रही है। 28 फरवरी 2019 तक इस बिल के तहत दिवालिया कंपनियों से 1.42 लाख करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी है। 
  5. 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने चलन में मौजूद 500 और एक हजार रुपये के नोट को बंद कर दिया था। सरकार के इस अभूतपूर्व कदम की जानकारी पीएम के अलावा केवल जेटली और कुछ चुनिंदा लोगों को ही थी। नोटबंदी करने का फैसला लेने में जेटली की अहम भूमिका रही थी। जेटली के वित्त मंत्री रहते हुए नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था।
  6. जेटली ने वित्त मंत्री रहते हुए रेल बजट को आम बजट में शामिल कर दिया। उससे पहले रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश किया जाता था। उन्होंने बजट पेश करने की तारीख में बदलाव किया। पहले यह फरवरी महीने की आखिरी तारीख में पेश किया जाता था। लेकिन, अरुण जेटली ने इसे एक महीना पहले 1 फरवरी कर दी।
  7. निवेशकों को लुभाने के लिए और निवेश की रफ्तार को बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने कार्यकाल में FDI के नियमों को आसान किया। इससे विदेशी निवेशक बड़ी संख्या में भारत में निवेश करने लगे। प्रधानमंत्री जनधन अकाउंट योजना की शुरुआत भी जेटली के वित्त मंत्री रहते ही की गई। आज वर्तमान में 40 करोड़ से ज्यादा जनधन अकाउंट हैं। इन अकाउंट में 1 लाख करोड़ से ज्यादा रुपये जमा हैं। 
  8. देश में गरीबों को फायदा पहुंचाने के लिए कई योजनाओं के तहत सब्सिडी दी जा रही थी। इसमें भ्रष्टाचार की बड़ी शिकायतें थीं। तत्कालीन मनमोहन सरकार ने सब्सिडी में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लाभार्थियों को सीधे बैंक खाते में सब्सिडी का पैसा देने की योजना बनाई थी। इस योजना को लागू भी किया गया, लेकिन इसके मनमाफिक परिणाम नहीं मिले। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद अरुण जेटली के नेतृत्व में इस योजना को कड़ाई से लागू किया गया। आज सभी योजना की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।
  9. बैंक पर NPA बोझ को कम करने की दिशा में उनके शासनकाल में कई बड़े फैसले लिए गए। साथ ही घाटे से जूझ रहे बैंकों में कंसोलिडेशन का सिलसिला भी उसी समय शुरू हुआ।
  10. देश भर में डिजिटल बैंकिंग को बढ़ाने का श्रेय भी जेटली को जाता है। डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, मोबाइल वॉलेट, पीओएस मशीन, यूपीआई भीम ऐप जैसी सेवाओं को पूरे देश में शुरू करवाया गया था। इसके चलते नगद ट्रांजेक्शन में काफी कमी देखने को मिली और अब लोग इनका अधिक संख्या में प्रयोग करने लगे हैं। 

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