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पिज्‍जा पर ग्राहकों की जेब काट रहा था डोमिनोज, जुबीलिएंट फूड वर्क्‍स को मिला मुनाफारोधी नोटिस

 Edited By: Abhishek Shrivastava
 Published : Apr 03, 2018 06:01 pm IST,  Updated : Apr 03, 2018 06:01 pm IST

सेफगार्ड महानिदेशालय (डीजीएस) ने जुबीलिएंट फूड वर्क्स को मुनाफाखोरी को लेकर नोटिस दिया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने अपने डोमिनोज पिज्जा स्टोर पर जीएसटी दर में कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं दिया।

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नई दिल्ली। सेफगार्ड महानिदेशालय (डीजीएस) ने जुबीलिएंट फूड वर्क्स को मुनाफाखोरी को लेकर नोटिस दिया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने अपने डोमिनोज पिज्जा स्टोर पर जीएसटी दर में कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं दिया। एक सूत्र ने कहा कि स्थायी समिति ने मामले को डीजीएस के पास भेजा। महानिदेशालय ने जुबीलिएंट फूड वर्क्स को नोटिस जारी कर यह पूछा है कि क्या नवंबर में कर दर में कटौती का लाभ ग्राहकों को दिया गया।  

जीएसटी में मुनाफारोधी व्यवस्था के तहत स्थानीय प्रकृति की शिकायतों को पहले राज्य स्तरीय निगरानी समिति को भेजा जाता है, जबकि राष्ट्रीय स्तर के मामलों को स्थायी समिति के पास भेजा जाता है।  

सूत्र ने कहा कि जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने के बाद डोमिनोज पिज्जा की तरफ से अधिक शुल्क लिए जाने को लेकर स्थायी समिति में दो ग्राहकों की तरफ से शिकायतें थीं। जुबीलिएंट फूड वर्क्स ने कहा है कि वह अभी कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। क्‍योंकि अभी वह जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।  

जीएसटी परिषद ने सभी रेस्‍टॉरेंट्स के लिए शुल्क में कटौती की थी और इसे 5 प्रतिशत कर दिया था। हालांकि इसमें वे रेस्‍टॉरेंट्स शामिल नहीं हैं, जो ऐसे होटल के भीतर स्थित जहां कमरों का किराया 7,500 रुपए और उससे ऊपर हैं। इस कटौती से पहले एयर कंडीशन रेस्‍टॉरेंट्स पर 18 प्रतिशत तथा बिना एयर कंडीशन वाले रेस्‍टॉरेंट्स पर 12 प्रतिशत शुल्क का प्रावधान था। 

सूत्रों के अनुसार एक जुलाई से जीएसटी के लागू होने के बाद जुबीलिएंट फूड वर्क्स समेत 15 मुनाफोखोरी नोटिस दिए गए हैं। जुबीलिएंट फूड वर्क्स ने नोटिस का जवाब दे दिया है। अभी इन जवाब को देखा जा रहा है तथा जरूरत पड़ने पर और सवाल भेजे जाएंगे।  

दस्तावेजों को देखने के बाद डीजीएस अपनी रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए  मुनाफारोधी प्राधिकरण को देगा। इसमें जुर्माना तथा पंजीकरण रद्द करने जैसे कदम शामिल हैं। डीजीएस को मामले की जांच तीन महीने के भीतर पूरी करनी है और स्थायी समिति से तीन महीने का और समय मांग सकती है। 

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