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भारतीय कंपनियों ने 2016 में किए 52 अरब डॉलर के विलय-अधिग्रहण, अगले साल नोटबंदी का दिखेगा असर

वर्ष 2016 में कंपनियों के बोर्डरूम में काफी हलचल का माहौल रहा क्योंकि इस अवधि में कंपनियों ने 52 अरब डॉलर से ज्यादा राशि के विलय-अधिग्रहण को अंजाम दिया।

Dharmender Chaudhary
Published : Dec 22, 2016 04:21 pm IST, Updated : Dec 22, 2016 04:21 pm IST
Year Ender 2016: भारतीय कंपनियों ने 2016 में किए 52 अरब डॉलर के विलय-अधिग्रहण, अगले साल नोटबंदी का दिखेगा असर- India TV Paisa
Year Ender 2016: भारतीय कंपनियों ने 2016 में किए 52 अरब डॉलर के विलय-अधिग्रहण, अगले साल नोटबंदी का दिखेगा असर

नई दिल्ली। वर्ष 2016 में कंपनियों के बोर्डरूम में काफी हलचल का माहौल रहा क्योंकि इस अवधि में कंपनियों ने 52 अरब डॉलर से ज्यादा राशि के विलय-अधिग्रहण को अंजाम दिया। आने वाले साल में इस आंकड़े के और बढ़ने की संभावना है। भारतीय कंपनियों में वैश्विक निवेशकों का रूझान बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस साल सौदों का मूल्य बढ़ने की अहम वजह विभिन्न क्षेत्रों में बड़े लेनदेन और एकीकरण होना है। इसी तरह का रूख 2017 में भी जारी रह सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाला साल घरेलू सौदों के साथ-साथ बाहर से होने वाले सौदों को लेकर भी आशान्वित दिख रहा है। लेकिन यह धारणा वृहद-आर्थिक रख और बुनियादी ढांचा एवं बिजली जैसे अन्य क्षेत्रों में सुधारों पर निर्भर करेगा।

सलाहकार कंपनी ईवाई के अनुसार 2016 में घोषित सौदों का कुल अनुमानित मूल्य 52.6 अरब डॉलर है जो 2015 के 31.3 अरब डॉलर से काफी अधिक है। हालांकि वर्ष 2016 में सौदों की संख्या घटकर 756 रह गई जो 2015 में 886 थी।

ईवाई में लेनदेन सलाहकार सेवा के पार्टनर अजय अरोड़ा ने कहा, 2017 में विलय-अधिग्रहण गतिविधियों के सकारात्मक बने रहने की उम्मीद है क्योंकि वित्तीय और रणनीतिक निवेशकों का भारतीय अर्थव्यस्था में रूझान बना हुआ है। प्रौद्योगिकी, लाइफ साइंसेज और वित्तीय सेवा जैसे क्षेत्रों में ज्यादा निवेश आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि नोटबंदी के चलते निकट समय में सौदों में कमी आ सकती है लेकिन आने वाले वर्षों में मध्यम एवं दीर्घावधि में नोटबंदी और जीएसटी से फायदा होगा।

  • मर्जरमार्केट इंडिया ब्यूरो की प्रमुख सविता क्रामण के अनुसार जीएसटी से अधिकतर कंपनियों का मुनाफा बेहतर होगा।
  • यह कर ढांचे की जटिलताओं को भी सुधारेगा।
  • इससे कंपनियों का प्रदर्शन सुधरेगा और उनकी बचत भी बढ़ेगी जिसका अंतिम लाभ ग्राहक को भी मिलेगा।
  • इस प्रकार दोनों तरह के सुधारों से कारोबार असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र की ओर अग्रसर होगा और इससे भारत एक निवेश स्थल के रूप में और आकर्षक बनेगा।
  • 2017 में आर्थिक माहौल विभिन्न घरेलू और वैश्विक कारणों से अस्थिर रह सकता है जिससे घरेलू बाजार में वास्तिवक तौर पर एकीकरण बढ़ सकता है।
  • इसमें बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवा और ई-वाणिज्य कारोबार क्षेत्र शामिल हैं।

कारपोरेट प्रोफेशनल के संस्थापक पवन कुमार विजय का मानना है कि सरकार के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने से पेटीएम और उसके जैसी स्टार्टअप कंपनियों को लाभ होगा। जीएसटी के बारे में विजय ने कहा कि इसका अनुपालन सितंबर 2017 से होने की संभावना है और पहले साल की इसकी अपनी चुनौतियां हैं तो इसका प्रभाव 12 से 18 महीने के बाद ही दिखेगा।

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