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पर्यावरण को लेकर भारत बेहद संजीदा, पेरिस समझौते के लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना: सीतारमण

Edited by: India TV Paisa Desk Published : Oct 16, 2021 09:31 am IST, Updated : Oct 16, 2021 09:31 am IST

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘विद्युत उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंचने वाली है, जो कि भारत के 40 प्रतिशत के संकल्प से अधिक है।’’

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पर्यावरण को लेकर भारत बेहद संजीदा, पेरिस समझौते के लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना: सीतारमण

वाशिंगटन। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कहा है कि भारत वर्ष 2005 के स्तर से, 2030 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद का 33-35 प्रतिशत उत्सर्जन कम करने के पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि 2030 तक 4,50,000 मेगावाट का भारत का महत्त्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सफल वैश्विक अभियान में पासा पलटने वाला साबित होने वाला है। 

सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय समिति की बैठक में अपने संबोधन में कहा कि भारत प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के मामले में शायद ही शीर्ष 100 देशों की सूची में आता है और इसका प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपयोग विश्व औसत से आधे से भी कम है। उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी, भारत अपने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में अग्रसर है, जो कि 2005 के स्तर से, 2030 तक उत्सर्जन को अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 33-35 प्रतिशत तक कम करना है। इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि भारत इस लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करेगा।’’ 

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘विद्युत उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंचने वाली है, जो कि भारत के 40 प्रतिशत के संकल्प से अधिक है।’’ सीतारमण ने कहा कि भारत ने 2030 तक 4,50,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता के लक्ष्य के साथ दुनिया में सबसे महत्त्वाकांक्षी हरित ऊर्जा परियोजना शुरू की है, जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत के अभियान में पासा पलटने वाला साबित हो सकता है और दुनिया के लिए जलवायु परिवर्तन की रोकथाम में मददगार होगा। 

उन्होंने कहा कि भारत और बाकी विकासशील देशों के लिए विकट चुनौती पर्याप्त और सस्ता वित्त तथा कम लागत वाली प्रौद्योगिकी तक पहुंच है। सीतारमण ने कहा, ‘‘विकासशील देशों को 2030 तक सालाना 500 अरब डॉलर तक के नए निवेश की जरूरत होगी, ताकि उनके बढ़ते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित किया जा सके।

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