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लोन नहीं चुकाया तो प्रॉपर्टी पर कब्जा कर सकते हैं बैंक, RBI ने जारी किए मसौदा नियम

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 06, 2026 12:24 pm IST,  Updated : May 06, 2026 12:24 pm IST

मसौदे के अनुसार, सिर्फ वो लोन ही इस प्रावधान के अंतर्गत आएंगे जिन्हें एनपीए घोषित किया गया हो और जिनमें अन्य सभी वसूली विकल्पों की जांच कर उन्हें अनुपयोगी पाया गया हो।

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रिकवरी के तहत प्रॉपर्टी पर कब्जा करने के लिए नए नियम प्रस्तावित Image Source : AFP

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को मसौदा दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) लोन रिकवरी की प्रक्रिया में सिर्फ अपवादस्वरूप ही अचल संपत्तियों का अधिग्रहण कर सकेंगी। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि विनियमित इकाइयों (RE) से सामान्य परिस्थितियों में अपेक्षा नहीं की जाती कि वे अपनी नियमित कर्ज गतिविधियों के बदले गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों पर कब्जा करें। हालांकि, अपवाद की स्थितियों में, जब लोन गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) बन जाता है और कानूनी या संविदात्मक उपाय लागू किए जा चुके हों, तो विनियमित इकाइयां रिकवरी रणनीति के तहत गिरवी रखी गई अचल संपत्ति का स्वामित्व अपने हाथ में ले सकती हैं। 

रिकवरी के तहत प्रॉपर्टी पर कब्जा करने के लिए नए नियम प्रस्तावित

आरबीआई ने अपने 'निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों पर विवेकपूर्ण मानदंड' मसौदे में कहा कि ऐसी परिसंपत्तियों का नियंत्रित और समयबद्ध निपटान, निष्पक्ष आधार पर किया जाए तो वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता और विवेक बनाए रखते हुए शुद्ध वसूली को अधिकतम किया जा सकता है। मसौदे के अनुसार, सिर्फ वो लोन ही इस प्रावधान के अंतर्गत आएंगे जिन्हें एनपीए घोषित किया गया हो और जिनमें अन्य सभी वसूली विकल्पों की जांच कर उन्हें अनुपयोगी पाया गया हो। विशिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्ति (एसएनएफए) का मतलब वो अचल संपत्ति है, जिसे किसी विनियमित संस्था ने उधारकर्ता से अपने दावे के पूर्ण या आंशिक निपटान के बदले में प्राप्त किया हो। इसमें गैर-बैंकिंग परिसंपत्तियां (एनबीए) भी शामिल हैं। 

आरबीआई ने 26 मई तक मांगे टिप्पणी और सुझाव

मसौदे के मुताबिक, विनियमित संस्थाएं उधारकर्ता पर अपने दावे के पूर्ण या आंशिक निपटान के बदले में विशिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियां प्राप्त कर सकती हैं। इसके अलावा, ऐसे विशिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्ति के समय पर निपटान को सुनिश्चित करने के लिए अधिकतम 7 साल की अवधि का प्रस्ताव भी किया गया है। आरबीआई ने कहा कि इन मसौदा नियमों को ऐसे परिसंपत्तियों के लिए सावधानीपूर्ण नियामकीय व्यवस्था को स्पष्ट करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। इस पर 26 मई तक टिप्पणी और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। 

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