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बार-बार ट्रैफिक रूल तोड़ने वालों की खैर नहीं! सरकार ला रही नया सिस्टम, रद्द हो सकता है ड्राइविंग लाइसेंस

Edited By: Shivendra Singh Published : Feb 27, 2026 07:15 am IST, Updated : Feb 27, 2026 07:18 am IST

ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों पर सख्ती करने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार ग्रेड-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस प्रणाली लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर अंक काटे जाएंगे और बार-बार गलती करने वालों का लाइसेंस निलंबित या रद्द भी हो सकता है।

बार-बार ट्रैफिक रूल...- India TV Paisa
Photo:ANI बार-बार ट्रैफिक रूल तोड़ने पर सस्पेंड हो सकता है ड्राइविंग लाइसेंस

देश में हर साल लाखों सड़क हादसे सिर्फ लापरवाही की वजह से होते हैं। तेज रफ्तार, मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग, शराब पीकर वाहन चलाना या रेड लाइट के बावजूद गाड़ी भगाना… ये छोटी दिखने वाली गलतियां हजारों परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल देती हैं। अब ऐसे लापरवाह चालकों पर लगाम कसने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। जल्द ही ड्राइविंग लाइसेंस में ‘ग्रेडेड अंक प्रणाली’ लागू की जा सकती है, जिसके तहत बार-बार नियम तोड़ने वालों का लाइसेंस निलंबित या रद्द तक हो सकता है।

क्या है ग्रेडेड अंक प्रणाली?

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संकेत दिए हैं कि सरकार ड्राइविंग लाइसेंस में अंक आधारित व्यवस्था लागू करेगी। इस सिस्टम के तहत हर लाइसेंस पर निर्धारित अंक होंगे। जैसे ही कोई चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके लाइसेंस से कुछ अंक काट लिए जाएंगे। तेज गति, लापरवाही से वाहन चलाना, सिग्नल तोड़ना, गलत दिशा में गाड़ी चलाना या नशे में ड्राइविंग जैसे गंभीर उल्लंघनों पर ज्यादा अंक कट सकते हैं। अगर सभी अंक खत्म हो जाते हैं, तो लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। नियमों का दोहराव होने पर लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है।

क्यों जरूरी पड़ा यह कदम?

भारत में हर साल करीब पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और लगभग 1.8 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इनमें बड़ी संख्या 18 से 45 वर्ष के युवाओं की है। हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करना, ओवरस्पीडिंग और मोबाइल फोन का उपयोग प्रमुख कारण हैं। सरकार पहले ही ट्रैफिक जुर्माने बढ़ा चुकी है, लेकिन सिर्फ जुर्माना बढ़ाना पर्याप्त नहीं साबित हुआ। सबसे बड़ी चुनौती नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है। ऐसे में अंक आधारित प्रणाली लोगों को जिम्मेदारी से वाहन चलाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

दुर्घटना पीड़ितों के लिए राहत

सरकार सड़क सुरक्षा के साथ-साथ दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल मदद देने पर भी जोर दे रही है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क हादसे के शिकार लोगों को दुर्घटना की तारीख से सात दिन तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। मंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने में हिचकिचाएं नहीं। कानूनी झंझट या खर्च की चिंता किए बिना घायल को अस्पताल पहुंचाना अब आसान और सुरक्षित बनाया गया है।

जिम्मेदार ड्राइविंग ही असली समाधान

सरकार का कहना है कि सड़क सुरक्षा सिर्फ सख्त कानून बनाने से नहीं आएगी, बल्कि लोगों के जागरूक और जिम्मेदार बनने से आएगी। नया ग्रेडेड अंक सिस्टम उन लोगों के लिए साफ चेतावनी है जो बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं। अब गलती दोहराने पर सीधे लाइसेंस पर असर पड़ेगा। इसलिए सुरक्षित और सावधानी से गाड़ी चलाना ही अपनी और दूसरों की जान बचाने का सबसे आसान तरीका है।

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