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पेट्रोल में अब 20% एथेनॉल अनिवार्य! 1 अप्रैल से पूरे देश में लागू होगा नया नियम; सरकार का आदेश

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Feb 26, 2026 05:14 pm IST,  Updated : Feb 26, 2026 05:14 pm IST

देश में पेट्रोल की क्वालिटी को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 1 अप्रैल से देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाकर बेचना अनिवार्य होगा।

देशभर 20% एथेनॉल मिलाकर...- India TV Hindi
देशभर 20% एथेनॉल मिलाकर बेचा जाएगा पेट्रोल! Image Source : CANVA

देशभर के वाहन चालकों के लिए 1 अप्रैल से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब 20% तक एथेनॉल मिला पेट्रोल (E20) बेचा जाएगा। यह फैसला पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अधिसूचना के जरिए लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम न सिर्फ आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाएगा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करेगा।

क्या है नया आदेश?

सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया है कि वे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के मानकों के अनुरूप, न्यूनतम 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) वाला 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल देशभर में उपलब्ध कराएं। RON ईंधन की क्वालिटी और स्थिरता का पैमाना है। यह बताता है कि बिना नॉकिंग के ईंधन इंजन में कितनी कंप्रेशन सह सकता है। नॉकिंग की स्थिति में इंजन को नुकसान पहुंच सकता है। एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर लगभग 108 होता है, जिससे पेट्रोल की नॉक-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।

एथेनॉल क्यों अहम है?

एथेनॉल मुख्यतः गन्ना, मक्का और अन्य अनाजों से बनाया जाता है। यह पेट्रोल की तुलना में ज्यादा स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और कृषि उत्पादों की मांग बढ़ती है। सरकार के मुताबिक, 2014-15 से अब तक एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के कारण देश ने 1.40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। भारत ने जून 2022 में 10% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया था। इसके बाद 20% ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2025-26 तक के लिए तय किया गया था, जिसे अब व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है।

वाहन चालकों पर क्या होगा असर?

ज्यादातर नए वाहन (2023 के बाद निर्मित) E20 के अनुरूप डिजाइन किए गए हैं और उन्हें किसी बड़ी तकनीकी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, पुराने वाहनों में 3-7% तक माइलेज कम हो सकता है। कुछ मामलों में रबर और प्लास्टिक पार्ट्स पर असर पड़ने की आशंका भी जताई गई है। फिर भी, सरकार और ऑटो उद्योग का मानना है कि यह बदलाव धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से लागू होगा, जिससे आम उपभोक्ताओं पर बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा।

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