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80 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकती हैं कच्चे तेल की कीमतें, गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में कई अहम बातें आईं सामने

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Oct 17, 2026 02:13 pm IST,  Updated : Oct 17, 2026 02:13 pm IST

मिडिल-ईस्ट से ऑयल एक्सपोर्ट में सुधार, फारस की खाड़ी के बाहर उत्पादन में बढ़ोतरी और मांग में कमी के कारण ग्लोबल लेवल पर सप्लाई डेफिसिट काफी कम हो गया है।

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80 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकती हैं कच्चे तेल की कीमतें Image Source : AFP

ग्लोबल फाइनेंशियल कंपनी गोल्डमैन सैक्स की एक रिसर्च के अनुसार, 2027 में कच्चे तेल की कीमतें घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं। गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि मिडिल-ईस्ट से सप्लाई में सुधार हो रहा है और तेल बाजार सरप्लस (अतिरिक्त आपूर्ति) की स्थिति की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के और तेज होने पर कीमतें उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।

दिसंबर 2026 में 90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करेगा ब्रेंट क्रूड 

गोल्डमैन सैक्स में ग्लोबल कमोडिटीज रिसर्च के को-हेड और ऑयल रिसर्च हेड, डान स्ट्रुवेन ने एक रिपोर्ट में बताया कि कंपनी का अनुमान है कि दिसंबर 2026 में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करेगा (पहले ये अनुमान 85 डॉलर था)। इसके बाद, 2027 में इसकी औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है।

काफी कम हो गया है सप्लाई डेफिसिट 

कंपनी के अनुसार, मिडिल-ईस्ट से ऑयल एक्सपोर्ट में सुधार, फारस की खाड़ी के बाहर उत्पादन में बढ़ोतरी और मांग में कमी के कारण ग्लोबल लेवल पर सप्लाई डेफिसिट काफी कम हो गया है। सितंबर में बाजार लगभग संतुलित था, जहां डिमांड सप्लाई से सिर्फ 0.3 मिलियन बैरल प्रति दिन (mb/d) ज्यादा थी, जबकि मार्च में सप्लाई डेफिसिट 7.2 mb/d थी।

2026 की चौथी तिमाही में सरप्लस की स्थिति में आ जाएगा वैश्विक तेल बाजार 

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही में वैश्विक तेल बाजार सरप्लस की स्थिति में आ जाएगा और 2027 में भी यही स्थिति बनी रहेगी, जिससे कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। सितंबर के अंत तक फारस की खाड़ी से तेल निर्यात में सुधार होकर ये लगभग 2025 के औसत स्तर पर पहुंच गया है। इसका एक कारण ये है कि निर्यातकों ने संघर्ष के माहौल के अनुसार खुद को ढाल लिया है और ट्रांसपोर्ट क्षमता का विस्तार किया है।

अभी भी ऊंची बनी हुई हैं तेल की कीमतें

हालांकि, सप्लाई से जुड़े जोखिमों के कारण कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। निकट भविष्य में डिलीवरी के लिए फिजिकल ब्रेंट क्रूड की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं, जबकि बेंचमार्क ब्रेंट फ्यूचर्स हाल ही में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहे हैं। स्ट्रुवेन ने कहा, "फिजिकल कीमतें ऊंची बनी हुई हैं क्योंकि तनाव बढ़ने से डिलीवरी पर खतरा है, जबकि ग्लोबल लेवल पर इन्वेंट्री रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब है, जिससे स्टॉक फिर से भरने की मजबूत मांग पैदा हो रही है।"

कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 25 डॉलर प्रति बैरल का रिस्क प्रीमियम शामिल

रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की मौजूदा कीमतों में लगभग 25 डॉलर प्रति बैरल का 'रिस्क प्रीमियम' शामिल है। ये इस बात को दर्शाता है कि अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो सप्लाई में और रुकावट आ सकती है और मौजूदा भंडार में और कमी आ सकती है। मांग के मोर्चे पर, 2026 की तीसरी तिमाही में वैश्विक तेल की खपत में सालाना आधार पर 3.3 mb/d की गिरावट आई। इस कमजोरी का मुख्य असर चीन, मध्य पूर्व और विकसित एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में देखने को मिला।

गोल्डमैन सैक्स को उम्मीद है कि जैसे-जैसे रिफाइंड तेल उत्पादों की उपलब्धता और किफायती पहुंच बेहतर होगी, मांग में धीरे-धीरे सुधार आएगा। हालांकि, गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि 2027 की चौथी तिमाही में वैश्विक तेल की मांग, तनाव से जुड़े झटकों के बिना वाली संभावित स्थिति से 0.7 mb/d कम रहेगी। इसका एक कारण इलेक्ट्रिक गाड़ियों को तेजी से अपनाना और चीन में ईंधन की खपत के तरीकों में बदलाव होना है।

ANI Inputs

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