भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि अस्थिर और प्रतिकूल बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत घरेलू खपत और निवेश के दम पर उच्च वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है। आरबीआई की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के ताजा संस्करण की भूमिका में मल्होत्रा ने लिखा है, ‘‘वित्तीय स्थिरता बनाए रखना और वित्तीय प्रणाली को मजबूत करना हमारा मार्गदर्शक सिद्धांत बना हुआ है।’’ उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र के नियामक यह मानते हैं कि वित्तीय स्थिरता अपने आप में एक लक्ष्य नहीं है।
आरबीआई गवर्नर का इन खास बातों पर जोर
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नवाचार और वृद्धि को बढ़ावा देना, उपभोक्ताओं की रक्षा करना, विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना जो वित्तीय प्रणाली की दक्षता में सुधार करता है, समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। गवर्नर ने कहा, ‘‘नीति निर्माताओं का सबसे महत्वपूर्ण योगदान एक ऐसी वित्तीय प्रणाली को बढ़ावा देना है जो मजबूत और झटकों के प्रति मजबूत हो, वित्तीय सेवाएं प्रदान करने में कुशल हो तथा जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा दे।’’
मजबूत बनी हुई है भारतीय अर्थव्यवस्था तथा वित्तीय प्रणाली
संजय मल्होत्रा ने कहा कि मजबूत वृद्धि, कम मुद्रास्फीति, वित्तीय और गैर-वित्तीय कंपनियों का बेहतर बही-खाता, पर्याप्त भंडार और सूझ-बूझ वाले नीति सुधारों से भारतीय अर्थव्यवस्था तथा वित्तीय प्रणाली मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘अस्थिर और प्रतिकूल बाहरी कारकों के बावजूद, मजबूत घरेलू खपत एवं निवेश से भारतीय अर्थव्यवस्था के उच्च वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है। फिर भी, हम बाह्य प्रभावों से उत्पन्न होने वाली अल्पकालिक चुनौतियों को पहचानते हैं और अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए निरंतर मजबूत उपाय कर रहे हैं।’’
आरबीआई के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा 2025
बताते चलें कि आरबीआई के लिए ये साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा। इस साल आरबीआई ने अपने 90 साल पूरे किए और इसी साल उसके लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से रुपये की तेजी से गिरती वैल्यूएशन को संभालना रहा। केंद्रीय बैंक का कहना है कि उसका बाजार में हस्तक्षेप किसी स्तर को बचाने के लिए नहीं, बल्कि उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए होता है।