भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने से भारत में कोई बड़ी आर्थिक बाधा उत्पन्न नहीं होगी। हालांकि, ये पाकिस्तान के लिए झटका होगा क्योंकि इससे उसका विदेशी मुद्रा भंडार दबाव में आ सकता है और उसका ग्रोथ रेट प्रभावित हो सकता है। रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने 'भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव से पाकिस्तान के ग्रोथ पर असर' टाइटल से सोमवार को रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया कि उसे भारत की आर्थिक गतिविधियों में कोई बड़ा व्यवधान उत्पन्न होने के आसार नहीं दिखते क्योंकि पाकिस्तान के साथ उसके आर्थिक संबंध बहुत मामूली हैं। साल 2024 में भारत के कुल एक्सपोर्ट में इसकी हिस्सेदारी महज 0.5 प्रतिशत से भी कम रही थी।
सरकार के मौजूदा राजकोषीय समेकन में आएगी बाधा
मूडीज ने कहा, ‘‘ भारत के साथ लगातार तनाव बढ़ने से पाकिस्तान के ग्रोथ पर असर पड़ेगा और सरकार के मौजूदा राजकोषीय समेकन में बाधा आएगी, जिससे पाकिस्तान की व्यापक आर्थिक स्थिरता हासिल करने की प्रगति बाधित होगी।’’इस बात पर भी गौर करने की जरूरत है कि पाकिस्तान की वृहद आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है, ग्रोथ रेट धीरे-धीरे बढ़ रहा है, महंगाई घट रही है और आईएमएफ प्रोग्राम में लगातार प्रगति के बीच विदेशी मुद्रा भंडार में भी तेजी आ रही है। मूडीज ने कहा, ‘‘ तनाव लगातार बढ़ने से पाकिस्तान की बाहरी फाइनेंसिंग तक पहुंच बाधित हो सकती है और उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ सकता है जो अगले कुछ सालों के लिए उसके बाहरी कर्ज भुगतान की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी स्तर से काफी कम है।’’
9 मई को पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलेगा आईएमएफ का कार्यकारी बोर्ड
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का कार्यकारी बोर्ड 9 मई को पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलने वाला है, जिसमें जलवायु परिवर्तन ऋण कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान के लिए 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर की नई वित्तपोषण व्यवस्था का मूल्यांकन किया जाएगा। ये मौजूदा 7 अरब डॉलर के ‘राहत’ पैकेज का भी मूल्यांकन करेगा। सूत्रों ने बताया कि भारत आईएमएफ समेत वैश्विक बहुपक्षीय एजेंसियों से पाकिस्तान को दिए गए धन और ऋण की फिर से जांच करने के लिए कहेगा।
भारत में स्थिर रहेंगी वृहद आर्थिक स्थितियां
मूडीज ने कहा कि भारत में वृहद आर्थिक स्थितियां स्थिर रहेंगी, जो मजबूत सार्वजनिक निवेश तथा स्वस्थ निजी खपत के बीच धीमी लेकिन अब भी उच्चस्तर की वृद्धि से मजबूत होंगी। रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘ स्थानीय तनाव में निरंतर वृद्धि के परिदृश्य में, हम भारत की आर्थिक गतिविधियों में बड़े व्यवधान के आसार नहीं देखते हैं, क्योंकि पाकिस्तान के साथ भारत के आर्थिक संबंध बहुत मामूली हैं। हालांकि, उच्च रक्षा खर्च संभावित रूप से भारत की राजकोषीय ताकत पर भार डालेगा और इसके राजकोषीय समेकन को धीमा कर देगा।’’
पीटीआई इनपुट्स के साथ