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फाइनेंस बिल 2026 लोकसभा में पास, सरकार ने जोड़े 32 अहम संशोधन, जानें पूरी डिटेल

 Published : Mar 25, 2026 04:06 pm IST,  Updated : Mar 25, 2026 06:10 pm IST

फाइनेंस बिल 2026 के जरिये सरकार की कोशिश है कि एक ऐसा टैक्स सिस्टम बनाया जाए जिसमें ज्यादा जांच पड़ताल के बदले टैक्सपेयर्स के विश्वास पर आधारित हो।

लोकसभा में संबोधित करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।- India TV Hindi
लोकसभा में संबोधित करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। Image Source : SANSAD TV

लोकसभा ने बुधवार को वित्त विधेयक 2026 को पारित कर दिया। इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार की नीतियां भरोसे पर आधारित टैक्स सिस्टम, बेहतर जीवन-स्तर और कारोबार के अनुकूल माहौल बनाने पर केंद्रित हैं। संसद में अपने संबोधन में सीतारमण ने कहा कि भारत में सुधार मजबूरी में नहीं, बल्कि विश्वास, स्पष्टता और प्रतिबद्धता के साथ किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा टैक्स सिस्टम तैयार करना है, जो अत्यधिक जांच के बजाय करदाताओं के भरोसे पर आधारित हो।

लंबी अवधि में आर्थिक विकास की सोच

वित्त मंत्री ने लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार की सुधार नीति अल्पकालिक चुनौतियों के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक विकास की सोच पर आधारित है। उन्होंने बताया कि टैक्स ढांचे को सरल बनाना और छोटे कारोबारियों व व्यक्तिगत करदाताओं को राहत देना सरकार की प्राथमिकता रही है। सीतारमण के अनुसार, भरोसे पर आधारित कर प्रणाली स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देती है, विवादों को कम करती है और टैक्स व्यवस्था में पारदर्शिता लाती है।

राजस्व आवंटन को लेकर उठे सवाल पर जवाब

राज्यों के लिए राजस्व आवंटन को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य-संबंधित योजनाओं पर सरकार का खर्च, उपकर और अधिभार से होने वाली आय से अधिक है। इससे केंद्र की राज्यों को वित्तीय सहायता देने की प्रतिबद्धता झलकती है। एमएसएमई सेक्टर का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि छोटे और मध्यम उद्यम सरकार की नीति के केंद्र में हैं, ताकि उन्हें बेहतर कारोबारी माहौल मिल सके।

उन्होंने कहा कि एमएसएमई के लिए हमारी नीति ‘पहले सुविधा, बाद में सख्ती’ की है। पहले उन्हें मदद दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर ही सख्ती की जाएगी। सीतारमण ने यह भी बताया कि एमएसएमई के लिए तकनीकी चूक, जैसे ऑडिट न कराने पर लगने वाले जुर्माने को अब तय शुल्क (फिक्स्ड फीस) में बदल दिया गया है, जिससे उन्हें अनिश्चितता से राहत मिलेगी।

किन विषयों पर किया गया है संशोधन

प्रत्यक्ष कर

  • आयकर अधिनियम, 1961 के तहत आयकर के कई सेक्शन में मौजूद प्रावधानों में संशोधन किया गया है।
  • आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत आयकर के कई सेक्शन में संशोधन किया गया है।
  • लघु करदाताओं की विदेशी संपत्तियों की प्रकटीकरण योजना, 2026 में संशोधन किया गया है।

अप्रत्यक्ष कर

  • सीमा शुल्क (कस्टम्स) की धाराओं में संशोधन किया गया है। 
  • सीमा शुल्क की दर के प्रथम अनुसूची में संशोधन किया गया है।

केंद्रीय माल और सेवा कर (सीजीएसटी)

  • केंद्रीय माल और सेवा कर के चार धाराओं या सेक्शन में संशोधन किया गया है।

एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी)

  • एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर की धारा 13 का संशोधन हुआ है। इसके तहत अधिनियम 14, 2001 की सातवीं अनुसूची में संशोधन हुआ है।

वित्त अधिनियम, 2001 में संशोधन किया गया है। काला धन (अघोषित विदेशी आय और आस्तियां) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 में संशोधन किया गया।

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