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अब कार नहीं, गोल्ड लोन बना लोगों की पहली पसंद! CRISIL की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Jul 06, 2026 08:21 pm IST,  Updated : Jul 06, 2026 08:21 pm IST

भारत में गोल्ड लोन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। अब स्थिति यह है कि गोल्ड लोन ने वाहन (कार) लोन को पीछे छोड़ दिया है। CRISIL Ratings की नई रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में गोल्ड लोन देश का सबसे बड़ा सिक्योरिटाइज्ड एसेट क्लास बन गया।

गोल्ड लोन की डिमांड...- India TV Hindi
गोल्ड लोन की डिमांड में जबरदस्त उछाल Image Source : CANVA

भारत में गोल्ड लोन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। अब लोग सिर्फ सोना खरीदने के लिए ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसके बदले लोन लेने को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में गोल्ड लोन देश का सबसे बड़ा सिक्योरिटाइज्ड एसेट क्लास बन गया है। CRISIL रेटिंग्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में गोल्ड लोन ने वाहन (कार) लोन को भी पीछे छोड़ दिया है।

क्या कहती है CRISIL की रिपोर्ट?

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में सिक्योरिटाइजेशन का कुल कारोबार करीब 60,000 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 22 फीसदी अधिक है। इसमें गोल्ड लोन की हिस्सेदारी करीब 31 फीसदी रही, जबकि वाहन लोन की हिस्सेदारी घटकर 26 फीसदी रह गई। यानी पहली बार गोल्ड लोन सबसे बड़ा सेक्टर बनकर उभरा है।

आखिर क्यों बढ़ी गोल्ड लोन की मांग?

सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और लोगों की बढ़ती फंड की जरूरत ने गोल्ड लोन को आकर्षक विकल्प बना दिया है। इसके अलावा, गोल्ड लोन जल्दी मिल जाता है, डॉक्यूमेंट्स कम लगते हैं और प्रक्रिया भी आसान होती है। यही कारण है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने भी बड़े पैमाने पर गोल्ड लोन के जरिए फंड जुटाया।

बैंक भी दिखा रहे हैं ज्यादा भरोसा

CRISIL के मुताबिक, सरकारी बैंकों समेत कई बैंकों ने गोल्ड लोन आधारित सिक्योरिटाइजेशन में सबसे ज्यादा निवेश किया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि गोल्ड लोन में डिफॉल्ट का रिस्क कम माना जाता है और बैंकों को नियामकीय लाभ भी मिलता है।

अन्य लोन सेगमेंट का भी बढ़ा कारोबार

रिपोर्ट में बताया गया है कि माइक्रोफाइनेंस लोन की हिस्सेदारी बढ़कर 14 फीसदी हो गई है, जबकि बिजनेस लोन की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक पहुंच गई। वहीं, मॉर्गेज आधारित सिक्योरिटाइजेशन (MBS) का हिस्सा घटकर 12 फीसदी रह गया, जो पिछले साल 21 फीसदी था।

आगे भी जारी रह सकती है तेजी

CRISIL का अनुमान है कि आने वाले महीनों में भी सिक्योरिटाइजेशन बाजार की रफ्तार बनी रहेगी। रिटेल लोन की मजबूत मांग, नए वित्तीय संस्थानों की बढ़ती भागीदारी और निवेशकों की दिलचस्पी इस बाजार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। यही वजह है कि अब गोल्ड लोन भारत के वित्तीय बाजार में सबसे तेजी से बढ़ने वाले विकल्पों में शामिल हो गया है।

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