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सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ एक्सपोर्ट पर लगने वाला विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स घटाया, 1 जून से लागू होंगी नई दरें

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 31, 2026 12:40 pm IST,  Updated : May 31, 2026 12:40 pm IST

पेट्रोल और डीजल के घरेलू इस्तेमाल पर लागू सड़क एवं अवसंरचना उपकर शून्य रहेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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सांकेतिक तस्वीर Image Source : SHELL GLOBAL

सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (जेट फ्यूल) के एक्सपोर्ट पर लगाए जाने वाले विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स में कटौती कर दी है। ये बदलाव 1 जून से लागू होगा। हालांकि, घरेलू खपत वाले ईंधन पर टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 3 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह, डीजल के एक्सपोर्ट पर लगाए जाने वाले टैक्स को 16.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। 

एटीएफ पर अब 16 रुपये के बजाय वसूला जाएगा 9.5 रुपये का टैक्स

पेट्रोल और डीजल के अलावा, सरकार ने हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल एटीएफ पर लगने वाले टैक्स को 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। टैक्स की ये नई दरें 1 जून से लागू होंगी। मंत्रालय ने ये भी स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल के घरेलू इस्तेमाल पर लागू सड़क एवं अवसंरचना उपकर शून्य रहेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने हाल के महीनों में जरूरत के हिसाब से अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स) व्यवस्था में कई बार बदलाव किया है। ये कदम कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर किया गया है। 

विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स में इतना उतार-चढ़ाव क्यों कर रही है सरकार

बताते चलें कि इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से ही कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी देखी जा रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से घरेलू बाजार तक इसकी पहुंच भी प्रभावित हुई है। पहले पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर भारी शुल्क लगाए गए थे, जिन्हें समय-समय पर समीक्षा के बाद घटाया जाता रहा है। ऐसा घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए किया जाता है। मंत्रालय ने कहा कि ये टैक्स व्यवस्था घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और वैश्विक कीमतों में अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकने के उद्देश्य से लागू की गई थी।

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