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General Elections 2024 : हर वोटर पर करीब 700 रुपये का खर्चा, यह है दुनिया का सबसे महंगा चुनाव, देखिए आंकड़े

 Written By: Pawan Jayaswal
 Published : May 12, 2024 06:27 pm IST,  Updated : May 12, 2024 06:27 pm IST

General Elections 2024 : इस बार आम चुनाव में खर्चा 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रह सकता है। यह खर्चा 2020 के यूएस इलेक्शन के करीब बराबर है।

आम चुनाव 2024- India TV Hindi
आम चुनाव 2024 Image Source : REUTERS

General Elections 2024 : देश में इन दिनों लोकसभा चुनाव चल रहे हैं। आपके मन में कभी यह सवाल जरूर आया होगा कि आम चुनाव में कितना पैसा खर्च होता है। चुनाव कराने से लेकर, पार्टियों के खर्चे, कैंडिडेट्स की रैलियां और बैनर-पोस्टर समेत तमाम खर्चे होते हैं। भारत में यह चुनाव दुनिया में सबसे महंगा है। एक वोट पर करीब 700 रुपये खर्च हो रहे हैं। भारत में 96.90 लाख वोटर्स हैं। पॉलिटिकल पार्टीज इन वोटर्स को स्पेशल फील कराने के लिए चुनाव से पहले भारी-भरकम खर्चा करती हैं। चुनावी खर्चों पर नजर रखने वाले सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के अनुसार, साल 2019 के आम चुनावों में अनुमानित खर्च 55,000 से 60,000 करोड़ रुपये रहा था।

इस बार 1 लाख करोड़ रुपये हो सकता है खर्चा

एक अनुमान के अनुसार इस बार यह खर्चा 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रह सकता है। यह खर्चा 2020 के यूएस इलेक्शन के करीब बराबर है। इसमें 14.4 अरब डॉलर यानी 1.2 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे। हालांकि, इस खर्च से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में खपत में इजाफा होगा, जिससे जीडीपी में 0.2 से 0.3 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन बड़ा मुद्दा इलेक्शन स्पेडिंग के नेचर को लेकर है, जिसमें से अधिक अनअकाउंटेड है। वैसे तो चुनाव आयोग चुनावी खर्चे पर पर्याप्त व्यय नियंत्रण और संतुलन लगाता है, लेकिन पार्टियों के खर्चे के लिए कोई सीमा नहीं है। लिमिट सिर्फ उम्मीदवारों के लिए है। 

25000 से 95 लाख तक पहुंची लिमिट

जहां तक कैंडिडेट्स के खर्च की बात है, प्रत्येक कैंडिडेट लोकसभा चुनाव के लिए 75 से 95 लाख रुपये से अधिक (क्षेत्र के हिसाब से) खर्च नहीं कर सकता है। वहीं, विधानसभा चुनाव के लिए 28 से 40 लाख रुपये से अधिक नहीं खर्च कर सकता है। चुनावी खर्च की यह सीमा 1951-52 में हुए पहले चुनाव में 25,000 रुपये की थी।

2019 में कितना हुआ था खर्चा

2019 के चुनावों में 55-60 हजार करोड़ के कुल चुनावी खर्च का 20-25 फीसदी या 12-15 हजार करोड़ रुपया ही सीधा वोटर्स तक पहुंचा। बड़ा हिस्सा 20 से 25 हजार करोड़ रुपये कैंपेन और पब्लिसिटी पर खर्च हुआ था। चुनाव आयोग के डिसक्लोजर में आने वाला औपचारिक खर्च 10 से 12 हजार करोड़ रुपये था। 5000 से 6000 करोड़ रुपया लॉजिस्टिक्स में खर्च हुआ था।

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