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New Labour Codes: ग्रेच्युटी, मिनिमम वेज, ओवरटाइम और WFH पर बड़ा फैसला; नए श्रम कानून से नौकरीपेशा लोगों की बल्ले-बल्ले!

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Nov 22, 2025 11:08 am IST,  Updated : Nov 22, 2025 11:08 am IST

देश के 40 करोड़ से ज्यादा नौकरी करने वाले लोगों के लिए 21 नवंबर (शुक्रवार) का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को हटाकर उनकी जगह 4 नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं।

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लेबर कोड का मेगा अपडेट Image Source : CANVA

Labour codes: भारत में कामकाज की दुनिया बदलने जा रही है और वह भी ऐसे बदलावों के साथ, जिनका असर सीधे आपकी नौकरी, सैलरी और आपके अधिकारों पर पड़ने वाला है। सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं, जो 40 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और वर्करों को प्रभावित करेंगे। ये कोड न केवल कामकाज के माहौल को आधुनिक बनाएंगे, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा, वेतन, काम के घंटे, वर्क-फ्रॉम-होम और ग्रेच्युटी पर भी बड़ा बदलाव लेकर आए हैं। इन नियमों का मकसद है कि कंपनियों का काम आसान हो, लेकिन वर्करों के अधिकार भी पहले से ज्यादा मजबूत हों।

कोड 1: वेज कोड

नए वेज कोड के तहत अब देश के हर कर्मचारी को चाहे वह संगठित क्षेत्र में हो या असंगठित में मिनिमम वेज पाने का अधिकार होगा। सरकार एक फ्लोर वेज तय करेगी, जिसके नीचे कोई राज्य न्यूनतम वेतन नहीं रख सकेगा। इसके साथ ही ओवरटाइम पर अब कंपनियों को डबल पे देना अनिवार्य होगा। महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के साथ भर्ती या सैलरी में भेदभाव पूरी तरह वर्जित हो गया है।

कोड 2: इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड

इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड नौकरी की सुरक्षा और पारदर्शिता पर बड़ा फोकस करता है। फिक्स्ड टर्म कर्मचारी अब सिर्फ 1 साल में ग्रेच्युटी के हकदार होंगे। स्ट्राइक के लिए 14 दिन का नोटिस अनिवार्य होगा ताकि अचानक हड़तालें रोकी जा सकें। सर्विस सेक्टर में वर्क-फ्रॉम-होम को कानूनी मान्यता दे दी गई है।महिलाओं को शिकायत समितियों में समान भागीदारी मिलेगी। साथ ही, छंटनी और बंद करने के लिए अब 300 कर्मचारियों की सीमा रखी गई है।

कोड 3: सोशल सिक्योरिटी कोड

सोशल सिक्योरिटी कोड लागू होने से गिग वर्कर, प्लेटफॉर्म वर्कर और अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों को फायदा मिलेगा। अब ESIC पूरे देश में लागू होगा, मतलब पहले की तरह सिर्फ नोटिफाइड एरिया में ही इसकी सुविधा नहीं रहेगी। EPF से जुड़े मामलों में जांच की समय सीमा तय कर दी गई है, जिससे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। घर से ऑफिस आते-जाते समय अगर कोई दुर्घटना होती है, तो उसे भी अब ऑफिस से जुड़ा हादसा माना जाएगा। इसके अलावा, फिक्स्ड टर्म यानी तय अवधि के कर्मचारियों को भी सिर्फ 1 साल काम करने पर ग्रेच्युटी मिलने का अधिकार होगा।

कोड 4: सेफ्टी और वर्किंग कंडीशंस कोड

यह कोड कर्मचारियों की सुरक्षा और सेहत पर ध्यान देता है। इसके तहत हर कर्मचारी का साल में एक बार फ्री हेल्थ चेकअप कराना जरूरी होगा। रोज़ाना 8 घंटे और हफ्ते में 48 घंटे काम का नियम तय किया गया है। महिलाएं भी नाइट शिफ्ट में काम कर सकेंगी, लेकिन इसके लिए उन्हें जरूरी सुरक्षा इंतज़ाम दिए जाएंगे। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों में काम करने वाले माइग्रेंट वर्कर्स के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाया जाएगा, ताकि उनकी जानकारी एक जगह दर्ज रहे और उन्हें आसानी से सुविधाएं मिल सकें।

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