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जन विश्वास बिल 2026: डाइविंग लाइसेंस में देरी, चक्का जाम समेत 700 से ज्यादा छोटे अपराधों में अब नहीं होगी जेल; जुर्माने से होगा निपटारा

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Apr 04, 2026 12:28 pm IST,  Updated : Apr 04, 2026 12:29 pm IST

देश में कारोबार और आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए संसद ने जन विश्वास (संशोधन) बिल 2026 पास कर दिया है। इस बिल के तहत अब 700 से ज्यादा छोटे-मोटे अपराधों में जेल की सजा खत्म कर दी गई है और उनकी जगह जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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संसद में पेश हुआ जन विश्वास बिल 2026 Image Source : ANI

देश में कानून व्यवस्था को आसान और लोगों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। संसद के दोनों सदनों से जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) बिल 2026 पास हो गया है। इस बिल के तहत 700 से ज्यादा छोटे-छोटे अपराधों को अपराध की कैटेगरी से हटाकर अब उन्हें सिर्फ जुर्माने के जरिए निपटाया जाएगा। इसका सीधा फायदा आम लोगों और कारोबारियों को मिलेगा।

700 से ज्यादा अपराधों में खत्म होगी जेल

इस बिल के तहत कुल 784 प्रावधानों में बदलाव किया गया है, जिनमें से 717 को डिक्रिमिनलाइज किया गया है। इसका मतलब है कि अब कई छोटे मामलों जैसे दस्तावेजों में देरी, लाइसेंस संबंधी गड़बड़ी या अन्य तकनीकी गलतियों में जेल नहीं होगी। अब इन मामलों को मौद्रिक जुर्माने (फाइन) के जरिए सुलझाया जाएगा, जिससे लोगों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे।

ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य सेवाओं में राहत

इस बदलाव का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखेगा। जैसे ड्राइविंग लाइसेंस में देरी, कागजी कमी या छोटे नियम उल्लंघन जैसे मामलों में अब जेल का डर नहीं रहेगा। सरकार का उद्देश्य है कि छोटी-छोटी गलतियों के लिए सख्त सजा देने के बजाय लोगों को सुधार का मौका दिया जाए।

हेल्थ सेक्टर में भी बड़े बदलाव

इस बिल के तहत हेल्थ सेक्टर के कई अहम कानूनों में भी संशोधन किए गए हैं। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट में अब छोटे उल्लंघनों के लिए जेल की जगह जुर्माना लगाया जाएगा, जिससे अस्पतालों और कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा।

कोर्ट का बोझ होगा कम

सरकार का मानना है कि इस कदम से अदालतों पर बोझ कम होगा और छोटे मामलों का जल्दी निपटारा हो सकेगा। अब ऐसे मामलों के लिए एडजुडिकेशन सिस्टम बनाया गया है, जहां अधिकारी ही सुनवाई कर फैसला ले सकेंगे।

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