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इस वित्त मंत्री के नाम दर्ज है सबसे अधिक बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड, जानें दूसरे नंबर पर कौन?

 Written By: Vikash Tiwary @ivikashtiwary
 Published : Jan 13, 2023 11:05 pm IST,  Updated : Jan 19, 2023 04:04 pm IST

आजाद भारत का पहला बजट तात्कालीन वित्त मंत्री आर के षणमुखम शेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था, लेकिन सबसे अधिक बार पेश करने का मौका इंदिरा गांधी के करीबी रहे एक वित्त मंत्री को मिला था।

जानें किसने पेश किया सबसे अधिक बार भारत का आम बजट?- India TV Hindi
जानें किसने पेश किया सबसे अधिक बार भारत का आम बजट? Image Source : FILE

आम बजट में सरकार साल भर के खर्च और आमदनी का लेखाजोखा संसद के जरिए आम जनता के सामने रखती है। देश के वित्त मंत्री आम बजट को लोकसभा में पेश करते हैं। 1 फरवरी 2023 को वित्‍त मंत्री निर्मला सीता रमण आम बजट पेश करने वाली हैं। आजादी के बाद से आम बजट हर साल पेश किया जाता रहा है। आइए आज इसके बारे में कुछ रोचक तथ्य जानते हैं।

सबसे अधिक बार इन्होंने पेश किया था बजट 

एक वित्‍त मंत्री के तौर पर मोरारजी देसाई ने 10 बार आम बजट पेश किया था। इनमें से 8 पूर्ण बजट थे और 2 अंतरिम। वित्‍त मंत्री के तौर पर मोरारजी देसाई ने पहले टर्म में पांच पूर्ण बजट 1959-60 से 1993-64 और एक अंतरिम बजट 1962-63 पेश किया था। दूसरी बार वित्‍त मंत्री बनने के बाद मोरारजी देसाई ने 1967-68 से 1969-70 के पूर्ण बजट को उन्होनें पेश किया था। उसके अलावा 1967-68 का एक अंतरिम बजट भी पेश किया था।

इन 5 लोगों को मिला 7 बार बजट पेश करने का मौका

मोरारजी देसाई के बाद प्रणब मुखर्जी, पी चिदंबरम, यशवंत सिन्हा, वाईबी चौहान और सीडी देशमुख का स्‍थान आता है। इन सभी ने सात-सात बार बजट पेश किया। मनमोहन सिंह और टीटी कृष्णमचारी ने 6-6 बार बजट पेश किया। पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 5 बार बजट पेश किया है। आर वेंकटरमन और एचएम पटेल ने 3-3 बजट पेश किए। सबसे कम बार बजट पेश करने वाले वित्‍त मंत्रियों में जसवंत सिंह, वीपी सिंह, सी सुब्रमण्यम, जॉन मथाई और आर के शनमुखम ने दो-दो बार बजट पेश किया।

इस साल से बजट के दस्तावेज को हिंदी में तैयार किया जाने लगा

बता दें, आजाद भारत का पहला बजट तात्कालीन वित्त मंत्री आर के षणमुखम शेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। जॉन मथाई देश के दूसरे वित्त मंत्री थे, जिन्होंने 1949-50 का बजट पेश किया। यह ऐतिहासिक बजट था और महंगाई पर केंद्रित था। इसी बजट के जरिये देश ने योजना आयोग और पंचवर्षीय योजनाओं जैसे शब्दों को सुना था। सबसे खास बात यह थी कि साल 1955 के बाद यानी 1955-56 के बजट से ही बजट से जुड़े दस्तावेज हिंदी में भी तैयार किए जाने लगे थे।

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