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Auto के बाद अब Pharma सेक्टर पर टैरिफ लगाएंगे ट्रंप, क्या भारतीय दवा कंपनियों की बढ़ेगी मुसीबत?

Trump tariff on Pharma Sector : टैरिफ लगाने से अमेरिका अनजाने में अपनी घरेलू हेल्थकेयर लागत में वृद्धि कर सकता है। इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ेगा और हेल्थकेयर तक उनकी पहुंच दुर्लभ हो जाएगी।

Written By: Pawan Jayaswal
Published : Mar 29, 2025 09:40 am IST, Updated : Mar 29, 2025 09:40 am IST
फार्मा सेक्टर- India TV Paisa
Photo:FILE फार्मा सेक्टर

ऑटो इंपोर्ट पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही फार्मा प्रोडक्ट्स के आयात पर भी टैरिफ लगाने वाले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को कहा कि वे जल्द ही फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री को टार्गेट करने वाले टैरिफ की घोषणा करेंगे। हालांकि, उन्होंने इसकी टाइमिंग और रेट के बारे में नहीं बताया। मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने यह भी कहा कि वे अमेरिकी टैरिफ से बचने के इच्छुक देशों के साथ सौदे पर बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ऐसे समझौते उनके प्रशासन द्वारा 2 अप्रैल को रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा के बाद ही हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि ब्रिटेन सहित कुछ देशों ने संभावित डील्स पर चर्चा करने के लिए अमेरिका से संपर्क किया है। भारत के कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भी हाल ही में कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर जारी बातचीत ‘अच्छी तरह’ आगे बढ़ रही है।

10 में से 4 भारतीय दवाएं लिखते हैं अमेरिकी डॉक्टर

ऑटो सेक्टर के बाद फार्मा प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाने के ट्रंप के वादे से भारतीय दवा कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा, यह एक बड़ा सवाल है। इस समय अमेरिका भारतीय दवाओं पर कोई शुल्क नहीं लगाता है। अमेरिका में दवा सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा भारतीय दवा कंपनियां करती हैं। साल 2022 में अमेरिका में डॉक्टर्स द्वारा लिखे गए पर्चों में 40 फीसदी यानी 10 में से चार के लिए दवाओं की सप्लाई भारतीय कंपनियों ने की थी। इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार, कुल मिलाकर भारतीय कंपनियों की दवाओं से 2022 में अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को 219 अरब डॉलर की बचत हुई और 2013 से 2022 के बीच कुल 1,300 अरब डॉलर की बचत हुई। भारत का दवा उद्योग वर्तमान में अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर है और इसके कुल निर्यात में अमेरिका का हिस्सा लगभग एक-तिहाई है। 

अमेरिका में बढ़ जाएगी महंगाई

शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के पार्टनर अरविंद शर्मा का कहना है कि टैरिफ लगाने से अमेरिका अनजाने में अपनी घरेलू हेल्थकेयर लागत में वृद्धि कर सकता है। इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ेगा और हेल्थकेयर तक उनकी पहुंच दुर्लभ हो जाएगी। अमेरिका अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए दवा उत्पादों का शुद्ध आयातक रहा है। लिमिटेड सप्लाई के चलते फार्मास्यूटिकल्स पर 25 फीसदी या उससे अधिक टैरिफ काफी मुश्किल है।

भारतीय दवा कंपनियों को हो सकता है फायदा

जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप फार्मा प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाते हैं, तो इससे भारतीय कंपनियों को फायदा हो सकता है। इसकी वजह है भारतीय दवा कंपनियों की बेहतर कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस। इसके चलते भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में अपने ग्लोबल कॉम्पिटिटर्स की तुलना में अधिक बाजार हिस्सेदारी हासिल कर सकती हैं। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, अगर 10% टैरिफ भी लगा तो इसका बड़ा हिस्सा ग्राहकों को ट्रांसफर कर दिया जाएगा, क्योंकि दवाइयों की रेगुलर डिमांड बनी रहेगी। जेपी मॉर्गन के अनुसार, अमेरिका में जेनरिक दवाएं बेचने वाली इजराइल और स्विट्जरलैंड की कंपनियां भारतीय कंपनियों की तुलना में कम प्रोफिट मार्जिन पर काम करती हैं, इसलिए टैरिफ से उन पर ज्यादा गंभीर असर पड़ेगा।

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