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WPI Inflation: थोक महंगाई अप्रैल में जोरदार घटकर 0.85% पर आई, इस वजह से मिली राहत

 Published : May 14, 2025 01:25 pm IST,  Updated : May 14, 2025 01:26 pm IST

मुद्रास्फीति में कमी आने से रिजर्व बैंक के लिए जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों में कटौती के एक और दौर को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनेगी।

खाद्य पदार्थों में अप्रैल में 0.86 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।- India TV Hindi
खाद्य पदार्थों में अप्रैल में 0.86 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। Image Source : INDIA TV

अप्रैल 2025 में थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मार्च के मुकाबले अप्रैल में यह घटकर 0.85 प्रतिशत पर आ गई। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों में कहा गया है कि खाद्य पदार्थों, विनिर्मित उत्पादों और ईंधन की कीमतों में कमी आने से थोक महंगाई में गिरावट देखी गई। पीटीआई की खबर के मुताबिक, मार्च में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 2.05 प्रतिशत थी। पिछले साल अप्रैल में यह 1.19 प्रतिशत थी।

इन वजहों से है पॉजिटिव दर

खबर के मुताबिक, उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अप्रैल, 2025 में मुद्रास्फीति की पॉजिटिव दर मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों के विनिर्माण, दूसरे विनिर्माण, रसायन और रासायनिक उत्पादों, दूसरे परिवहन उपकरणों के विनिर्माण और मशीनरी और उपकरणों के विनिर्माण आदि की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से है। थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य पदार्थों में अप्रैल में 0.86 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि मार्च में मुद्रास्फीति 1.57 प्रतिशत थी, जबकि सब्जियों में भारी गिरावट देखी गई। अप्रैल में सब्जियों में 18.26 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि मार्च में 15.88 प्रतिशत की गिरावट रही।

अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 3.16 प्रतिशत

प्याज में अप्रैल में मुद्रास्फीति घटकर 0.20 प्रतिशत रह गई, जबकि मार्च में यह 26.65 प्रतिशत थी। हालांकि, अप्रैल में विनिर्मित उत्पादों में मुद्रास्फीति 2.62 प्रतिशत रही, जबकि मार्च में यह 3.07 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली में भी अप्रैल में 2.18 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि मार्च में यह 0.20 प्रतिशत थी। आरबीआई मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को ध्यान में रखता है। मंगलवार को जारी आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 3.16 प्रतिशत रह गई, जिसकी मुख्य वजह सब्जियों, फलों, दालों और अन्य प्रोटीन युक्त वस्तुओं की कीमतों में नरमी है। जुलाई 2019 के बाद से यह मुद्रास्फीति का सबसे निचला स्तर है।

ब्याज दर में हो सकती है और कटौती

मुद्रास्फीति में कमी आने से रिजर्व बैंक के लिए जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों में कटौती के एक और दौर को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनेगी। अप्रैल में आरबीआई ने बेंचमार्क नीति दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती करके इसे 6 प्रतिशत कर दिया था। यह वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए दूसरी कटौती है, जो अमेरिका के पारस्परिक टैरिफ के खतरे का सामना कर रही है। आरबीआई को चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति औसतन 4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछला अनुमान 4.2 प्रतिशत था।

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