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SEBI ने सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज पर लगाया 1 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना, जानें क्या है पूरा मामला

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Jul 21, 2026 07:11 am IST,  Updated : Jul 21, 2026 07:11 am IST

मार्केट रेगुलेटर ने अपने 88 पन्नों के आदेश में कहा कि सीडीएसएल अपने इंटरनेट-फेसिंग 'एक्टिव डायरेक्टरी फेडरेशन सर्विसेज' (ADFS) सर्वर को अहम संपत्ति के तौर पर क्लासिफाई करने में नाकाम रहा।

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18 नवंबर, 2022 का है पूरा मामला Image Source : PTI

सिक्यॉरिटी मार्केट रेगुलेटर सेबी ने सोमवार को सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड पर 1 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड यानी CDSL पर ये जुर्माना नवंबर 2022 में हुए मैलवेयर अटैक से जुड़ी साइबर सुरक्षा खामियों के कारण लगाया गया है, जिससे कंपनी का सिस्टम बाधित हुआ था। बताते चलें कि सेबी भी समय-समय पर अलग-अलग तरह के जोखिमों को लेकर निवेशकों को सतर्क करता रहता है

सीडीएसएल के अधिकारियों के खिलाफ क्या हुई कार्रवाई

इस पूरे मामले में सेबी ने सीडीएसएल के पूर्व मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी राजेश नाडकर्णी और पूर्व मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी अमित महाजन के खिलाफ चल रही जांच की कार्रवाई को बिना किसी आर्थिक जुर्माने के खत्म कर दिया। सेबी ने माना कि इन खामियों के लिए राजेश नाडकर्णी और अमित महाजन को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। 

18 नवंबर, 2022 को हुए मैलवेयर अटैक का है पूरा मामला

ये आदेश 18 नवंबर, 2022 को हुए मैलवेयर अटैक के मामले में आया है, जिसने सीडीएसएल के कई अहम सिस्टम को बाधित कर दिया था। मार्केट रेगुलेटर ने अपने 88 पन्नों के आदेश में कहा कि सीडीएसएल अपने इंटरनेट-फेसिंग 'एक्टिव डायरेक्टरी फेडरेशन सर्विसेज' (ADFS) सर्वर को अहम संपत्ति के तौर पर क्लासिफाई करने में नाकाम रहा। इसके साथ ही, कंपनी ने इसे ''वल्नरेबिलिटी असेसमेंट एंड पेनेट्रेशन टेस्टिंग' (VAPT) से बाहर रखा और रेगुलेटरी नियमों के बावजूद बुनियादी साइबर सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए। 

सेबी ने किस आधार पर तय की जुर्माने की राशि

जुर्माना तय करते समय, सेबी ने बाजार की अखंडता और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में डिपॉजिटरी की अहम भूमिका को ध्यान में रखा। उसने कहा कि ऐसे मार्केट इंफ्रा इंस्टीट्यूशन्स में साइबर रिस्क का असर सिर्फ उस इंस्टीट्यूट तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ ही, सेबी ने कहा कि उसने मैलवेयर हमले के बाद सीडीएसएल द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों और साइबर सुरक्षा घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए अपनी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत पहले ही अलग से लगाए गए 10 लाख रुपये के फाइनेंशियल पेनल्टी पर भी विचार किया। 

45 दिनों के भीतर भरना होगा 1 करोड़ रुपये का जुर्माना

इसके अनुसार, सेबी ने सीडीएसएल पर रेगुलेटर द्वारा तय किए गए अलग-अलग साइबर सिक्यॉरिटी और साइबर सिक्यॉरिटी की जरूरतों का पालन न करने के लिए सेबी अधिनियम के तहत 90 लाख रुपये और डिपॉजिटरी एक्ट के तहत 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। सेबी ने सीडीएसएल को 45 दिनों के भीतर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया।

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