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पहले से तैयार मकानों को GST के तहत नहीं मिलेगी राहत, खरीदारों को चुकानी होगी अधिक कीमत

GST के तहत निर्माणधीन परियोजनाओं पर प्रभावी कर की दर 12 प्रतिशत तक होगी। इसमें 6.5 प्रतिशत वृद्धि होगी।

Manish Mishra Manish Mishra
Published on: July 02, 2017 15:32 IST
पहले से तैयार मकानों को GST के तहत नहीं मिलेगी राहत, खरीदारों को चुकानी होगी अधिक कीमत- India TV Hindi News
पहले से तैयार मकानों को GST के तहत नहीं मिलेगी राहत, खरीदारों को चुकानी होगी अधिक कीमत

मुंबई। वस्‍तु एवं सेवा कर (GST) के तहत ग्राहकों को रहने के लिहाज से तैयार फ्लैट के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी क्योंकि जिन कंपनियों के पास बड़ी संख्या में पहले से तैयार बिना बिके मकान हैं उनके डेवलपर बढ़ी लागत का बोझ उसके खरीदारों पर डालने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, नए फ्लैट की लागत में कमी आएगी। इससे उन डेवलपरों को राहत मिलेगी जिनकी नई परियोजनाएं आने वाली हैं या परियोजनाएं शुरूआती चरण में हैं। GST के तहत निर्माणधीन परियोजनाओं पर प्रभावी कर की दर 12 प्रतिशत तक होगी। यह 6.5 प्रतिशत वृद्धि होगी। रियल्टी क्षेत्र पर वास्तिवक GST दर 18 प्रतिशत है लेकिन डेवलपर द्वारा ली जाने वाली कुल लागत पर जिस पर कर लगाया जाएगा, जमीन की लागत का एक बड़ा हिस्सा उससे अलग रखा जाएगा।

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रियल्‍टी डेवलपमेंट से जुड़ी कंपनियों का कहना है कि GST में कच्चे माल पर भुगतान किए गए कर का पूरा लाभ (इनपुट टैक्स क्रेडिट) लेने का विकल्प है लेकिन यह तैयार फ्लैट पर लागू नहीं होगा। इसके परिणामस्वरूप कंपनियों को उच्च कर का बोझ उठाना पड़ेगा या इसका बोझ ग्राहकों पर डालना होगा अथवा नए कर की दर के हिसाब से कीमतें बढ़ानी होंगी।

हाउस ऑफ हीरानंदानी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सुरेन्द्र हीरानंदानी ने कहा कि,

डेवलपरों को उन परियाजनाओं के संदर्भ में थोड़ा लाभ हो सकता है जो शुरुआती चरण में है। तैयार मकानों के मामले में उन्हें कर का बोझ उठाना पड़ेगा क्योंकि उन्हें GST के दायरे से बाहर रखा गया है।

गेरा डेवलपमेंट्स के प्रबंध निदेशक रोहित गेरा ने कहा कि,

GST व्यवस्था में निर्माणधीन परियोजनाओं पर कर 12 प्रतिशत होगा। यह खरीदारों के लिए 6.5 प्रतिशत अधिक है। कंपनियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करने का विकल्प है लेकिन यह तैयार मकानों पर लागू नहीं होगा।

गेरा ने कहा कि इसके कारण डेवलपरों को या तो कर का बोझा उठाना पड़ेगा या फिर उसके ग्राहकों पर टालना पड़ेगा अथवा कर के हिसाब से तैयार मकानों के दाम बढ़ाने पड़ेंगे। बेंगलुरू स्थित कंपनी साइट्रस वेंचर्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विनोद एस मेनन का कहना है कि हर कोई GST की सकारात्मक बातें कह रहा है लेकिन विस्तार में जाने पर इसमें जो समस्या दिखती है। ऐसा लगता है, उसको लेकर किसी के पास भी चीजें स्पष्ट नहीं है।

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मेनन ने कहा कि हालांकि, एक तिहाई कटौती के कारण प्रभावी दर 12 प्रतिशत है। मौजूदा प्रभावी वैट तथा सेवा कर के हिसाब से यह 9 प्रतिशत बैठता था। इस हिसाब से अब भी इसमें 3 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि चूंकि क्रेडिट का पूर्व की तिथि से दावे करने का कोई प्रावधान नहीं है, यह ग्राहकों तथा डेवलपर के बीच विवाद का विषय होगा कि कौन इसका वहन करेगा।

हालांकि, नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन शिशिर बैजल ने कहा कि नोटबंदी की तरह GST से कुछ समस्याएं होंगी लेकिन लंबी अवधि में यह उद्योग के लिए लाभदायक है। उन्होंने कहा, GST का मकसद पूरी कर प्रणाली में दक्षता लाना है। इसके क्रियान्वयन में कुछ दिक्कतें हैं लेकिन अंतत: इससे देश में अत्यंत प्रभावी कर प्रणाली का रास्ता साफ होगा।

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