अगर आप लंबे समय के लिए सुरक्षित और टैक्स-फ्री निवेश का विकल्प तलाश रहे हैं, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF एक बेहतरीन योजना साबित हो सकती है। नियमित रूप से हर महीने ₹11,000 निवेश करने पर यह स्कीम आपको कंपाउंडिंग का फायदा देती है और समय के साथ अच्छा फंड तैयार करने में मदद करती है। ऐसे में सवाल उठता है कि 15 साल की मैच्योरिटी पूरी होने पर आपको कुल कितना रिटर्न मिलेगा? आइए आसान कैलकुलेशन के जरिए समझते हैं।
कितना मिल रहा पीपीएफ पर ब्याज
अप्रैल 2026 के अनुसार, पीपीएफ की मौजूदा ब्याज दर 7.1% प्रति वर्ष है। यह दर हर तिमाही सरकार द्वारा समीक्षा की जाती है और पिछले कई सालों से स्थिर बनी हुई है। ब्याज सालाना कंपाउंड होता है, लेकिन हर महीने अकाउंट के न्यूनतम बैलेंस (5 तारीख से महीने के अंत तक) पर कैलकुलेट किया जाता है और 31 मार्च को क्रेडिट होता है।
हर महीने ₹11,000 जमा पर रिटर्न को समझिये
कुल जमा राशि (कुल निवेश): ₹11,000 × 12 × 15 = ₹19,80,000
कुल ब्याज (ब्याज कमाया): 7.1% ब्याज दर के आधार पर आपको कुल रिटर्न लगभग 14,91,248 रुपये मिलेगा।
मैच्योरिटी अमाउंट (मैच्योरिटी वैल्यू): लगभग ₹34,71,248 बनेगा जिसमें कुल निवेश राशि और ब्याज के तौर पर मिला रिटर्न शामिल है।
लंबी अवधि के निवेश के लिए आदर्श स्कीम है पीपीएफ
पीपीएफ स्कीम लंबी अवधि (15 साल लॉक-इन, जिसे बाद में 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है) के लिए आदर्श है। यह रिटायरमेंट प्लानिंग, बच्चों की पढ़ाई या शादी जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए बेहतरीन विकल्प है। बाजार की अस्थिरता से पूरी तरह सुरक्षित रहते हुए टैक्स-फ्री अच्छा रिटर्न मिलता है। यहां एक बात जान लें कि अगर आप हर साल अप्रैल की शुरुआत में पूरा योगदान कर देते हैं, तो ब्याज थोड़ा अधिक मिल सकता है।
PPF अकाउंट के टैक्स बेनिफिट्स
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) को “Exempt, Exempt, Exempt (EEE)” कैटेगरी का निवेश माना जाता है। यानी इसमें निवेश करने पर तीन अलग-अलग स्तरों पर टैक्स छूट मिलती है।
सबसे पहले, PPF में किया गया निवेश आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स डिडक्शन के लिए पात्र होता है। इसके तहत आप एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹1.50 लाख तक की छूट का लाभ ले सकते हैं, लेकिन यह सुविधा केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में ही उपलब्ध है।
दूसरा, PPF खाते पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। यानी इस पर किसी भी तरह का आयकर नहीं देना पड़ता। तीसरा, PPF की मैच्योरिटी या निकासी के समय मिलने वाली पूरी राशि भी पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। इसमें निवेश की गई रकम और उस पर मिला ब्याज दोनों शामिल होते हैं।