ट्रंप ने अपने आदेश में आगे कहा कि भारत ने ये स्पष्ट किया है कि वो अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा और हाल में अगले 10 सालों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ एक रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की है।
एक साल तक चली बातचीत के बाद दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में सफल रहे।
मंगलवार को सुबह 11.25 बजे तक बाजार की प्रमुख कंपनियों में शामिल अडाणी एंटरप्राइज़ेस के शेयर सबसे ज्यादा 10.76 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ कारोबार कर रहे थे।
अमेरिका की कृषि सचिव ब्रुक रॉलिन्स ने अमेरिकी किसानों के लिए एक बार फिर काम करने के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया।
मंगलवार को बीएसई का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 3656.74 अंकों (4.48%) की जोरदार उछाल के साथ 85,323.20 अंकों पर खुला।
वाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका, भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को भी हटा देगा।
ट्रंप ने दावा भी किया प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई है, और अब भारत अमेरिका से बहुत अधिक तेल खरीदने पर भी विचार करेगा।
दुनिया के सबसे ताकतवर पद पर बैठकर अगर कोई शख्स अपने निजी कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दे, तो उस पर सवाल उठना लाजिमी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों ठीक इसी वजह से सुर्खियों में हैं।
दुनिया की राजनीति में एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। ग्रीनलैंड पर कंट्रोल को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी देने वाले ट्रंप ने अचानक यू-टर्न लेते हुए आठ यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित टैरिफ को रद्द कर दिया है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूसी तेल का आयात बढ़ाया था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने चरणबद्ध तरीके से खरीद घटाई और अब उसने रूसी तेल की खरीद पूरी तरह रोक दी है।
जानकार बताते हैं कि यह गिरावट मुख्य रूप से ट्रंप की टैरिफ घोषणा से जुड़ी वैश्विक अनिश्चितता का नतीजा है, जो क्रिप्टो जैसे रिस्की एसेट्स पर सबसे पहले असर डालती है। निवेशकों को सलाह है कि बाजार की अस्थिरता के बीच सतर्क रहें और लंबी अवधि के परिप्रेक्ष्य में फैसले लें।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका की टैरिफ लगाने की ये घोषणा डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों को ग्रीनलैंड के दर्जे पर बातचीत के लिए दबाव में लाने की रणनीति हो सकती है।
सांसदों ने अपनी चिट्ठी में कहा कि भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जिसकी वैश्विक खपत में करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता गहरा गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ की वैधता पर फैसला देने से अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार खुद को पीछे खींच लिया है। बुधवार को शीर्ष अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल केस पर कोई निर्णय सुनाने से इनकार कर दिया।
बोर्गे ब्रेंडे ने कहा कि 18 जनवरी से शुरू होने वाली इस 5 दिनों की सालाना मीटिंग में यूक्रेन, गाजा और वेनेजुएला सहित लैटिन अमेरिका की स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति का खुद उन्हीं के देश में विरोध भी हो रहा है। खास बात यह है कि किसी देश द्वारा जिस रूसी तेल की खरीद पर ट्रंप हो हल्ला मचा रहे हैं, खुद अमेरिका भी उसका खरीदार है।
डोनाल्ड ट्रंप अब वेनेजुएला के तेल को अपने कंट्रोल में लेकर बड़ी मात्रा में तेल उत्पादन शुरू करने की योजना पर तेजी से काम कर रहे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा कि टैरिफ पॉलिसी की वजह से अमेरिका न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी उसकी स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
एक्सपर्ट्स ने कहा कि जैसे-जैसे टैरिफ का खतरा गहरा रहा है, भारत को रूसी तेल के मुद्दे पर एक स्पष्ट फैसला लेना होगा।
सर्राफा एसोसिएशन ने कहा कि भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने के कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने और चांदी दोनों की मांग में आज इजाफा देखने को मिला।
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