पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के सीनियर लीडर बिक्रम सिंह मजीठिया को सुरक्षा को घटा दिया गया है। पंजाब पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि पूर्व मंत्री की सुरक्षा वापस ले ली गई है। पुलिस अधिकारी का बयान शिअद नेता सुखबीर सिंह बादल द्वारा यह दावा किए जाने के एक दिन बाद आया है कि पंजाब सरकार ने मजीठिया की ‘Z प्लस’ सुरक्षा वापस ले ली है।
उन्होंने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार द्वारा पूर्व मंत्री को परेशान किया जा रहा है।
'सुरक्षा वापस लिए जाने की खबरें सही नहीं'
विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अर्पित शुक्ला ने बताया कि मजीठिया की सुरक्षा वापस लिए जाने की खबरें गलत हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा घेरा खतरे की आशंका के आधार पर प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा, "सुरक्षा समीक्षा समिति समय-समय पर इसका आकलन करती है और खतरे की आशंका के आधार पर सुरक्षा बढ़ाने या घटाने का फैसला लेती है।" उन्होंने आगे यह भी कहा, "अभी भी उनके पास पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल, एस्कॉर्ट वाहन और बंदूकधारी मौजूद हैं।"
पूर्व शिअद अध्यक्ष बादल ने 'एक्स' पर किया था पोस्ट
बता दें कि पूर्व शिअद अध्यक्ष बादल ने मंगलवार को दावा किया था कि पंजाब सरकार ने मजीठिया की सुरक्षा वापस ले ली है। उनहोंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में यह दावा किया था, "बिक्रम सिंह मजीठिया की पूरी जेडप्लस सुरक्षा वापस लेना, अकाली दल नेतृत्व के खिलाफ आम आदमी पार्टी सरकार की खतरनाक और घातक साजिशों की बिना किसी संदेह के पुष्टि करता है।"
मजीठिया ने भी उनकी Z प्लस सुरक्षा वापस लेने के लिए राज्य सरकार की निंदा की थी। पूर्व मंत्री ने कहा था, "जब वे मेरी आवाज दबाने में असफल रहे तो उन्होंने 29 मार्च की शाम को मेरी सुरक्षा वापस ले ली।"
बीजेपी ने भी इस कदम की निंदा की
बीजेपी की पंजाब यूनिट के चीफ सुनील जाखड़ ने भी इस कदम की निंदा की थी। उन्होंने कहा, "बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा राजनीतिक कारणों से हटाई गई है या नहीं, यह तो किसी और दिन बहस का विषय है, लेकिन मैं भगवंत मान सरकार को यह बताना चाहूंगा कि निजी सनक, स्वार्थ और राजनीतिक प्रतिशोध के चलते कभी भी ऐसे जल्दबाजी भरे फैसले नहीं लिए जाने चाहिए। किसी नेता की सुरक्षा वापस लेकर व्यक्तिगत हिसाब बराबर करना मुख्यमंत्री की कुर्सी का अपमान है, अगर मुख्यमंत्री को इसकी परवाह है तो।" (इनपुट-भाषा)
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