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पंजाब में एक महीने में पराली जलाने की 241 घटनाएं हुईं दर्ज, तरनतारन और अमृतसर टॉप पर

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Oct 19, 2025 04:40 pm IST,  Updated : Oct 19, 2025 04:43 pm IST

पंजाब में इस मौसम में पराली जलाने की 241 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें तरनतारन जिले में सबसे अधिक 88 घटनाएं हुई हैं।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : FILE (PTI)

चंडीगढ़: पंजाब में इस मौसम में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे दिल्ली और उत्तर भारत की वायु गुणवत्ता पर खतरा मंडरा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 18 अक्टूबर तक राज्य में पराली जलाने की कुल 241 घटनाएं दर्ज की गई हैं, क्योंकि किसान पराली नहीं जलाने की सरकारी अपील को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं।

तरनतारन में सबसे अधिक मामले

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, पराली जलाने के मामलों में तरनतारन जिला सबसे आगे है, जहां सबसे अधिक 88 घटनाएं हुई हैं। इसके बाद अमृतसर में 80, फिरोजपुर में 16 और पटियाला में 11 घटनाएं दर्ज की गई हैं। यह संख्या 11 अक्टूबर तक दर्ज की गई 116 घटनाओं से 125 अधिक है, जो मामलों की तेजी से बढ़ती दर को दर्शाती है। पराली जलाने की घटनाओं को दर्ज करने का काम 30 नवंबर तक जारी रहेगा।

जुर्माना और कानूनी कार्रवाई

राज्य सरकार ने इन घटनाओं पर सख्ती दिखाते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक 113 मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति  के रूप में 5.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है, जिसमें से 4.15 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं।

कुल 132 FIR दर्ज की गई हैं। इनमें से सबसे अधिक 50 तरनतारन में और 37 अमृतसर में दर्ज की गई हैं। ये मामले भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (किसी लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा) के तहत दर्ज किए गए हैं।

पराली जलाने वाले किसानों के भूमि अभिलेखों में 87 'लाल प्रविष्टियां' भी दर्ज की गई हैं, जिनमें सबसे ज्यादा तरनतारन और अमृतसर में हैं।

दिल्ली में प्रदूषण की मुख्य वजह

विशेषज्ञों का कहना है कि धान की कटाई के बाद रबी की फसल (गेहूं) की बुवाई के लिए किसानों के पास समय कम होता है, जिसके चलते कुछ किसान जल्दी से खेत खाली करने के लिए फसल अवशेषों में आग लगा देते हैं। अक्टूबर और नवंबर में होने वाली यह पराली की आग अक्सर दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार मानी जाती है। (इनपुट- भाषा)

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