राजस्थान के जोधपुर में एक व्यक्ति ने अपने ही ई-रिक्शा में पेट्रोल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया। हालांकि, अन्य लोगों ने समय रहते पानी डालकर आग बुझा दी। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया और ई-रिक्शा भी पूरी तरह जलकर खाक नहीं हुआ। घटना शहर के पांचवीं रोड की है। यहां कोहिनूर के सामने उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक ऑटो चालक (मालिक) ने अपने नए ई-रिक्शा को आग के हवाले कर दिया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए पानी छिड़ककर आग पर काबू पा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
पीड़ित ऑटो चालक ने बताया कि उसने बजाज शोरूम से नई बैट्री वाली रिक्शा खरीदी थी, लेकिन खरीद के कुछ ही समय बाद उसमें गंभीर तकनीकी खामी सामने आई। रिक्शा की बैट्रियां चार्ज नहीं हो रही थीं, जिससे उसकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा था। इस समस्या को लेकर वह कई बार एजेंसी के चक्कर काटता रहा, लेकिन उसे कोई संतोषजनक समाधान नहीं दिया गया।
कंपनी के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप
आरोप है कि शिकायत करने पर एजेंसी कर्मचारियों ने न केवल समस्या को गंभीरता से नहीं लिया, बल्कि कथित तौर पर यह तक कह दिया कि “अगर गाड़ी चार्ज नहीं हो रही है तो इसे जला दो।” इस गैर जिम्मेदाराना और असंवेदनशील रवैये से आहत होकर ऑटो चालक भावनात्मक रूप से टूट गया और गुस्से व हताशा में आकर उसने पेट्रोल छिड़ककर रिक्शा में आग लगा दी।
ऑटो ड्राइवर की बेबसी बनी चर्चा का विषय
घटना के बाद क्षेत्र में मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। लोगों का कहना है कि यह घटना किसी प्रदर्शन से ज्यादा एक गरीब मेहनतकश की बेबसी और व्यवस्था के प्रति उसकी निराशा को दर्शाती है। समय रहते आग बुझा ली गई, अन्यथा बड़ा नुकसान हो सकता था। यह मामला अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब एक आम आदमी अपनी समस्या लेकर कंपनी के पास जाता है तो उसे समाधान की जगह उपेक्षा क्यों मिलती है। यह घटना न केवल एक ऑटो चालक की पीड़ा को उजागर करती है, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों और कंपनियों की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
(जोधपुर से चंद्रशेखर व्यास की रिपोर्ट)
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