राजस्थान की राजधानी जयपुर में ट्रैवलिंग आर्ट फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा द्वारा किए गए एक फोटोशूट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस फोटोशूट में एक असली हाथी को चमकीले गुलाबी रंग में रंगा गया था, जिस पर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। यह फोटोशूट जैसे ही सामने आया, ऑनलाइन बहस छिड़ गई। कई लोगों ने तस्वीरों की खूबसूरती की तारीफ की, लेकिन बड़ी संख्या में यूजर्स ने हाथी के साथ इस तरह के व्यवहार को लेकर चिंता जताई। इसके साथ ही वन्यजीवों के इस्तेमाल और उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए।
यूजर्स ने क्या कहा?
जैसे ही फोटोशूट की तस्वीरें वायरल हुई, हजारों लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुछ लोगों ने जहां इसे क्रिएटिव और आकर्षक बताया है। लेकिन ज्यादातर यूजर्स ने इसकी आलोचना की है। एक यूजर ने लिखा, "तस्वीरें सुंदर दिखाने के लिए हाथी को तकलीफ देना गलत है, इसके लिए AI का इस्तेमाल किया जा सकता था।" वहीं दूसरे ने कहा, "ऑर्गेनिक रंग होने का मतलब यह नहीं कि पूरे जानवर को रंग दिया जाए, हाथियों की त्वचा संवेदनशील होती है।" हालांकि, काफी यूजर्स ने कलाकार की भावना की सराहना की, लेकिन तरीके पर सवाल उठाए। एक कमेंट में लिखा गया, "अच्छा लगा कि आपको जयपुर पसंद आया, लेकिन अगली बार हाथी को रंगना मत।"
फोटोग्राफर ने क्या कहा?
प्रोफेशनल फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेव ने बताया कि "इस शूट के लिए भारत आना पूरी तरह सार्थक था। मैंने जयपुर में 6 हफ्ते बिताए। पहले ही हफ्ते में, जब मेरा दिमाग शहर के रंगों और दृश्यों से भर गया था, तब यह आइडिया आया, क्लासिक राजस्थानी गेट्स के सामने एक गुलाबी हाथी। यहां हाथी हर जगह हैं, सड़कों पर, सजावट में, वास्तुकला में। लगभग राजस्थान का मुख्य प्रतीक। मैं इसे अपने प्रोजेक्ट में शामिल किए बिना नहीं रह सकती थी। यहां त्योहारों और समारोहों में हाथियों को सजाया जाता है। स्थानीय लोग उन्हें अलग-अलग रंगों से रंगते हैं। मैंने एक सॉलिड ब्राइट पिंक रंग चुना, जो राजस्थान में सबसे लोकप्रिय है। तैयारी काफी मुश्किल थी। मैंने कई हाथी फार्म्स का दौरा किया, ताकि ऐसे लोग मिल सकें जो सहयोग करने को तैयार हों। जिस फार्म का मैनेजर सबसे समझदार लगा, वहां मैं चार बार गई ताकि उन्हें यकीन हो सके कि मैं गंभीर हूं।"
फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेव ने आगे कहा- "फोटोशूट लोकेशन ढूंढना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। हेरिटेज साइट्स, परमिशन, सरकारी प्रक्रिया। मैं सुबह-सुबह तड़के ऑटो (टुक-टुक) से निकलती, खाली सड़कों और परफेक्ट मॉर्निंग लाइट की तलाश करती, ऐसी जगह ढूंढती जो संरक्षित हेरिटेज में शामिल न हो। आखिरकार मुझे जगह मिल गई जो भगवान गणेश का एक परित्यक्त मंदिर यानी हाथी के सिर वाले भगवान का मंदिर थी। जो इस शूट के लिए बिल्कुल सही।"
जूलिया बुरुलेव ने आगे कहा- "मॉडल ढूंढना भी आसान नहीं था। भारत जैसे कंजरवेटिव समाज में किसी को आधे कपड़ों में और गुलाबी रंग में पेंट होकर शूट के लिए तैयार करना मुश्किल था। मैंने दर्जनों मॉडल्स को मैसेज किया। लेकिन लगभग सभी ने मना कर दिया। कई लोगों को आइडिया पसंद आया, लेकिन उन्होंने कहा, हमारे परिवार वाले समझ नहीं पाएंगे। फिर मेरी मुलाकात यशस्वी से हुई। वह सच में बहादुर और साहसी थी। जो इस फोटोशूट के लिए तैयार हुई। इसके बाद फरवरी में हमने यह शूट कंप्लीट किया।"
ऑर्गेनिक, लोकल पेंट का इस्तेमाल किया- फोटोग्राफर
जूलिया ने कहा कि "जो लोग हाथी को लेकर चिंतित हैं, उनके लिए- हमने ऑर्गेनिक, लोकल पेंट का इस्तेमाल किया, वही जो त्योहारों में इस्तेमाल होता है, इसलिए जानवर के लिए पूरी तरह सुरक्षित था। वैसे भी भारत में एक चीज जो सच में काम करती है, वह है प्रोजेक्ट की सफलता के लिए प्रार्थना करना। बाकी तरीके लगभग बेकार है, और हमारी प्रार्थनाएं सफल हुई।"
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