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भाई दूज 2025 कब है? जानिए दीपोत्सव के अंतिम दिन निभाई जाने वाली इस परंपरा का शुभ मुहूर्त और महत्व

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Oct 01, 2025 11:53 pm IST,  Updated : Oct 01, 2025 11:56 pm IST

Bhai Dooj 2025: दीपोत्सव पांच दिनों का त्योहार होता है। धन त्रयोदशी से इस पर्व की शुरुआत होती है, जिसकी समाप्ति भाई दूज के साथ होती है। चलिए जानते हैं भाई दूज कब मनाया जाएगा और इसका शुभ मुहूर्त क्या है।

भाई दूज कब मनाया जाएगा- India TV Hindi
भाई दूज कब मनाया जाएगा Image Source : FREEPIK

Bhai Dooj 2025 Date: भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। यह पर्व दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव का आखिरी दिन होता है और इस दिन बहन अपने भाईयों की लंबी उम्र के साथ-साथ उनके सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन भाई अपनी बहनों के सुसराल पहुंचकर उनसे तिलक करवाते हैं। इस साल भाईदूज 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। चलिए जानते हैं क्या है इस पर्व का धार्मिक महत्व और शुभ मुहूर्त

भाई दूज तिथि और समय

पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर 2025 की रात 8:16 बजे शुरू होकर 23 अक्टूबर 2025 को रात 10:46 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, भाईदूज का उत्सव 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। 

तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भाई दूज के दिन भाईयों को तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:13 बजे से 03:28 बजे तक रहेगा। इस समय बहन अपने भाई के माथे पर तिलक कर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन बहन अपने भाई को तिलक करके मिठाई खिलाएंगी और भाई बहन को अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार देते हैं। 

भाई दूज का धार्मिक महत्व

भाई दूज का पर्व यमराज और यमुना की पौराणिक कथा से भी जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने आए थे। यमुनाजी ने उन्हें प्यार से स्वागत किया, आरती उतारी और तिलक लगाया। प्रसन्न होकर यमराज ने आशीर्वाद दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसकी अकाल मृत्यु नहीं होगी। कहते हैं कि वह कार्तिक महीने की दूज तिथि थी। इसके बाद से इस तिथि पर बहनों द्वारा अपने भाईयों की मंगलकामना के लिए उसे तिलक करने की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। 

भाईदूज की पूजा विधि

भाईदूज के दिन बहन को सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए। पूजा की थाली में दीपक, रोली, मिठाई, सूखा नारियल, हल्दी, अक्षत और मौली धागा रखें। भाई को उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में बैठकर बहन आरती उतारकर तिलक लगाए। इसके बाद मिठाई खिलाएं और भाई को उपहार दें।

भाई-बहन का अटूट रिश्ता

भाई दूज केवल त्योहार नहीं है, बल्कि भाई-बहन के प्यार और विश्वास को मजबूत करने का अवसर है। इस दिन दोनों एक-दूसरे के लिए प्रार्थना करते हैं और अपने रिश्ते को और मजबूती देते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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