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Falgun Purnima 2026 Date: फाल्गुन पूर्णिमा 2026 कब है? नोट कर लें सही तारीख, चंद्रोदय मुहूर्त और व्रत की संपूर्ण पूजा विधि

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Feb 27, 2026 05:31 pm IST,  Updated : Feb 27, 2026 05:31 pm IST

Falgun Purnima 2026 Date: फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि को लेकर इस बार कंफ्यूजन है। दो दिन यह तिथि पड़ने के कारण लोग असमंजस की स्थिति में है कि पूर्णिमा का व्रत किस दिन रखा जाएगा। तो आइए यहां जानते हैं फाल्गुन पूर्णिमा की सही तिथि और पूजा विधि क्या रहेगी।

Falgun Purnima 2026 फाल्गुन पूर्णिमा 2026 कब है- India TV Hindi
फाल्गुन पूर्णिमा 2026 कब है? Image Source : FREEPIK

Falgun Purnima 2026 Date: फाल्गुन पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन श्रद्धालु पूर्णिमा व्रत रखकर चंद्रदेव की पूजा करते हैं। साल 2026 में पूर्णिमा तिथि दो अलग-अलग दिनों में पड़ रही है और 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल है कि व्रत 2 मार्च को रखा जाए या 3 मार्च को। आइए जानते हैं शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा 2026 की सही तिथि क्या है। इसके साथ ही व्रत की संपूर्ण पूजा विधि भी यहां बताई जा रही है।
 
फाल्गुन पूर्णिमा 2026 सही तिथि क्या है?
 
पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 56 मिनट से प्रारंभ होगी और 3 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी। हालांकि, चंद्र ग्रहण 3 मार्च को भी लगेगा और इस दिन सूतक काल प्रभावी रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा व्रत उसी दिन किया जाता है, जब चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान हो। इस आधार पर 2 मार्च 2026 को व्रत रखना अधिक उपयुक्त और शास्त्र सम्मत माना जा रहा है।
 
फाल्गुन पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त - 05:19 ए एम से 06:08 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या - 05:44 ए एम से 06:57 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त - 12:27 पी एम से 01:14 पी एम
  • विजय मुहूर्त -  02:49 पी एम से 03:36 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त - 06:42 पी एम से 07:07 पी एम
  • रवि योग - 06:57 ए एम से 07:51 ए एम
  • चन्द्रोदय - 05:49 पी एम
फाल्गुन पूर्णिमा व्रत का महत्व
 
फाल्गुन पूर्णिमा को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान भगवान विष्णु और माता माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस व्रत से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है, धन-धान्य की प्राप्ति होती है और संतान सुख की कामना पूर्ण होती है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष होता है, उन्हें भी यह व्रत मानसिक शांति प्रदान करता है। पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व बताया गया है।
 
पूर्णिमा व्रत की संपूर्ण पूजा विधि
 
प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें।
 
  • सूर्यदेव को जल अर्पित कर व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान पर पीले वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • चंदन और कुमकुम की तिलक, पुष्प और वस्त्र अर्पित कर विधिवत पूजा करें।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और भोग लगाएं।
  • पूर्णिमा कथा का पाठ करने के बाद आरती करें।
  • चंद्रोदय के समय चंद्रमा को जल में कच्चा दूध मिलाकर जल अर्घ्य दें।
  • इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें।
  • अगले दिन दान-पुण्य करें, ऐसा करना व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए जरूरी माना जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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