1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. प्रदोष व्रत के दिन बन रहा मां गौरी और भगवान शिव की उपासना के लिए अद्भुत संयोग, जानें कैसे करनी है पूजा

प्रदोष व्रत के दिन बन रहा मां गौरी और भगवान शिव की उपासना के लिए अद्भुत संयोग, जानें कैसे करनी है पूजा

 Published : Jul 21, 2025 12:47 pm IST,  Updated : Jul 21, 2025 12:47 pm IST

22 जुलाई को मां गौरी और भगवान शिव की उपासना के लिए अद्भुत संयोग का निर्माण हो रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन कैसे मां गौरी और भगवान शिव की उपासना की जानी चाहिए...

मां गौरी और भगवान शिव- India TV Hindi
मां गौरी और भगवान शिव Image Source : SORA AI

सावन माह चल रहा है, 22 जुलाई को सावन का पहला प्रदोष व्रत पड़ रहा है। प्रदोष व्रत को भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद खास दिन माना जाता है। प्रदोष व्रत के दिन शाम को भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। इसके साथ ही इसी दिन मंगला गौरी व्रत भी है, जो महागौरी के प्रति समर्पित त्योहार माना गया है। ऐसे में इस दिन पूजा-उपासना करने से जातक को भगवान शिव के साथ ही महागौरी का भी आशीर्वाद मिलेगा। इस दिन शाम के समय (प्रदोष काल)  और निशीथ काल में भी पूजा की जाती है।

चूंकि कई वर्षों बाद मंगला गौरी व्रत और प्रदोष व्रत एक साथ पड़ रहे हैं। ऐसे में यह एक अद्भुत संयोग से कम नहीं हैं। इस दिन पूरे शिव परिवार का पूजन जातक को शुभ फल की प्राप्ति कराता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रदोष काल की पूजा

प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का समय होता है। इस समय को अध्यात्मिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। इस समय में योग, ध्यान और अध्यात्मिक क्रियाएं की जाती हैं। इसीलिए आदियोगी शिव की पूजा करना बेहद शुभ फलदायक है। प्रदोष काल में चार प्रहर की पूजा की जाती है। 

निशीथ काल की पूजा

जानकारी दे दें कि इस दिन निशीथ काल यानी रात के 9 बजे के बाद का समय होता है। इस दौरान शिवजी की पूजा के साथ भगवान शिव की स्तुति और स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। जैसे- रुद्राष्कम, शिव षडक्षर स्तोत्रम और शिव चालीसा।

कैसे करनी है पूजा?

सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठें और फिर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें और एक चौकी लें। फिर उस पर मां गौरी और भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। मां गौरी को लाल रंग का वस्त्र अर्पित करें और भगवान शिव को सफेद वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद प्रतिमा के सामने  घी का दीया जलाएं और शिव चालीसा और मां पार्वती की चालीसा करें। इसके बाद आरती करें और क्षमा याचना भी करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें:

सावन सोमवार व कामिका एकादशी पर अपनी राशिनुसार जपें मंत्र, बन जाएगा बिगड़ा काम

सावन के सोमवार के दिन शाम को पूजा के दौरान जरूर करें ये पाठ, महादेव दूर कर देंगे सारे दुख

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म