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Radha Ashtami 2025 Puja Vidhi, Muhurat Live: राधा अष्टमी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, स्तुति, कथा, आरती, भोग समेत सारी जानकारी मिलेगी यहां

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Updated : Sep 01, 2025 07:08 am IST

Radha Ashtami 2025 Puja Vidhi, Muhurat, Mantra, Katha, Aarti Live Update: आज यानी 31 अगस्त 2025 को राधा अष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त राधा रानी की विधि विधान पूजा करते हैं। यहां आप जानेंगे राधा अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र, कथा समेत सारी जानकारी।

radh ashtami 2025- India TV Hindi
राधा अष्टमी पूजा विधि Image Source : CANVA

Radha Ashtami 2025 Puja Vidhi, Muhurat, Mantra, Aarti, Katha Live Update: राधाष्टमी का त्योहार राधा रानी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदू पांचांग के अनुसार राधाष्टमी भाद्रपद महीने में शुक्ल पक्ष के आठवें दिन मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और शुभ मुहूर्त में राधा रानी की विधि विधान पूजा करते हैं। वैसे तो ये त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है लेकिन इसकी श्री खास रौनक ब्रज क्षेत्र में देखने को मिलती है। इस अवसर पर बरसाना स्थित श्री लाडली जी महाराज मन्दिर में विशाल महोत्सव का आयोजन किया जाता है। जहां श्री राधा जी का अभिषेक और विशेष पूजन किया जाता है। यहां आप जानेंगे राधा अष्टमी पर राधा रानी की पूजा कैसे की जाती है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है।

राधा अष्टमी पूजा मुहूर्त 2025 (Radha Ashtami Puja Muhurat 2025)

राधा अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त 31 अगस्त 2025 की सुबह 11:05 से दोपहर 01:38 बजे तक रहेगा। 

राधा अष्टमी पूजा विधि (Radha Ashtami Puja Vidhi)

  • राधा अष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद हाथ में अक्षत और कुछ फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • उसके बाद राधा रानी की प्रतिमा को साफ चौकी पर स्थापित करें।
  • राधा रानी को वस्त्र अर्पित करें और उनका श्रृंगार करें।
  • धूप-दीप जलाएंं और राधा रानी की भगवान कृष्ण सहित विधि विधान पूजा करें।
  • माखन मिश्री का भोग लगाएं।
  • पूजा के अंत में कथा का पाठ करें और राधा रानी की आरती करें।

राधा अष्टमी व्रत विधि (Radha Ashtami Vrat Vidhi In Hindi)

  • सुबह स्नानादि दैनिक कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद एक मंडप के नीचे एक मण्डल की रचना कर उसके बीच में मिट्टी या ताम्बे का कलश स्थापित करें।
  • कलश के ऊपर एक ताम्बे का पात्र रखें। फिर उस पात्र पर देवी श्री राधारानी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • प्रतिमा को दो नए वस्त्रों से ढक दें।
  • शुभ मुहूर्त में राधारानी की षोडशोपचार विधि द्वारा पूजा-अर्चना करें।
  • पूरे दिन उपवास करें और यदि असमर्थ हैं तो एक समय भोजन करके उपवास रख सकते हैं।
  • व्रत के अगले दिन पर सुहागिन स्त्रियों को प्रेमपूर्वक भोजन करवायें।
  • इसके बाद पूजन की गयी प्रतिमा आचार्य को दान कर दें।
  • इसके बाद अपना उपवास खोल लें।

राधा अष्टमी पूजा मंत्र (Radha Ashtami Puja Mantra)

  • ॐ राधायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्
  • राधे राधे जय जय राधे, राधे राधे जय जय राधे।

राधा अष्टमी व्रत कथा (Radha Ashtami Vrat Katha)

राधा अष्टमी की पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन वृषभानु जी को तालाब में खिले कमल के फूलों के बीच एक सुंदर कन्या दिखाई दी जिसे वे अपने घर ले आए, लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि वह बालिका आंखें नहीं खोल रही थी। वृषभानु जी को इस बात की बहुत चिंता हुई। मान्यता है कि राधा जी ने जन्म के बाद संकल्प लिया था कि वे अपनी आंखें तभी खोलेंगी जब वे सबसे पहले श्रीकृष्ण को देखेंगी। जब उनका सामना कृष्ण जी से हुआ, तभी उन्होंने अपनी आंखें खोलीं। वहीं द्मपुराण के अनुसार जब वृषभानु जी यज्ञ के लिए भूमि की सफाई कर रहे थे, तब धरती से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई। वृषभानु जी ने उस बालिका का नाम "राधा" रखा। कहते हैं जिस दिन राधा रानी वृषभानु जी को प्राप्त हुईं, वह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी। यही कारण है कि इस दिन को "राधा अष्टमी" के रूप में मनाया जाता है।

राधा अष्टमी भोग (Radha Ashtami Bhog)

  • केसर युक्त खीर
  • मिठाई (लड्डू, माखन-मिश्री आदि)

Radha Ashtami 2025 Puja Vidhi, Muhurat Live

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  • 2:18 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    ॥ श्री राधा कवचम् ॥ (Shri Radha Kavacham)

    श्रीगणेशाय नमः 
    पार्वत्युवाच
    कैलासिअवासिन् भगवन् भक्तानुग्रहकारक ।
    राधिकाकवचं पुण्यं कथयस्व मम प्रभो ॥ १॥
    यद्यस्ति करुणा नाथ त्राहि मां दुःखतो भयात् ।
    त्वमेव शरणं नाथ शूलपाणे पिनाकधृक् ॥ २॥
    शिव उवाच
    शृणुष्व गिरिजे तुभ्यं कवचं पूर्वसूचितम् ।
    सर्वरक्षाकरं पुण्यं सर्वहत्याहरं परम् ॥ ३॥
    हरिभक्तिप्रदं साक्षाद्भुक्तिमुक्तिप्रसाधनम् ।
    त्रैलोक्याकर्षणं देवि हरिसान्निध्यकारकम् ॥ ४॥
    सर्वत्र जयदं देवि सर्वशत्रुभयावहम् ।
    सर्वेषां चैव भूतानां मनोवृत्तिहरं परम् ॥ ५॥
    चतुर्धा मुक्तिजनकं सदानन्दकरं परम् ।
    राजसूयाश्वमेधानां यज्ञानां फलदायकम् ॥ ६॥
    इदं कवचमज्ञात्वा राधामन्त्रं च यो जपेत् ।
    स नाप्नोति फलं तस्य विघ्नास्तस्य पदे पदे ॥ ७॥
    ऋषिरस्य महादेवोऽनुष्टुप् छन्दश्च कीर्तितम् ।
    राधाऽस्य देवता प्रोक्ता रां बीजं कीलकं स्मृतम् ॥ ८॥
    धर्मार्थकाममोक्षेषु विनियोगः प्रकीर्तितः ।
    श्रीराधा मे शिरः पातु ललाटं राधिका तथा ॥ ९॥
    श्रीमती नेत्रयुगलं कर्णौ गोपेन्द्रनन्दिनी ।
    हरिप्रिया नासिकां च भ्रूयुगं शशिशोभना ॥ १०॥
    ओष्ठं पातु कृपादेवी अधरं गोपिका तथा ।
    वृषभानुसुता दन्तांश्चिबुकं गोपनन्दिनी ॥ ११॥
    चन्द्रावली पातु गण्डं जिह्वां कृष्णप्रिया तथा ।
    कण्ठं पातु हरिप्राणा हृदयं विजया तथा ॥ १२॥
    बाहू द्वौ चन्द्रवदना उदरं सुबलस्वसा ।
    कोटियोगान्विता पातु पादौ सौभद्रिका तथा ॥ १३॥
    नखांश्चन्द्रमुखी पातु गुल्फौ गोपालवल्लभा ।
    नखान् विधुमुखी देवी गोपी पादतलं तथा ॥ १४॥
    शुभप्रदा पातु पृष्ठं कुक्षौ श्रीकान्तवल्लभा ।
    जानुदेशं जया पातु हरिणी पातु सर्वतः ॥ १५॥
    वाक्यं वाणी सदा पातु धनागारं धनेश्वरी ।
    पूर्वां दिशं कृष्णरता कृष्णप्राणा च पश्चिमाम् ॥ १६॥
    उत्तरां हरिता पातु दक्षिणां वृषभानुजा ।
    चन्द्रावली नैशमेव दिवा क्ष्वेडितमेखला ॥ १७॥
    सौभाग्यदा मध्यदिने सायाह्ने कामरूपिणी ।
    रौद्री प्रातः पातु मां हि गोपिनी रजनीक्षये ॥ १८॥
    हेतुदा सङ्गवे पातु केतुमाला दिवार्धके ।
    शेषाऽपराह्णसमवे शमिता सर्वसन्धिषु ॥ १९॥
    योगिनी भोगसमये रतौ रतिप्रदा सदा ।
    कामेशी कौतुके नित्यं योगे रत्नावली मम ॥ २०॥
    सर्वदा सर्वकार्येषु राधिका कृष्णमानसा ।
    इत्येतत्कथितं देवि कवचं परमाद्भुतम् ॥ २१॥
    सर्वरक्षाकरं नाम महारक्षाकरं परम् ।
    प्रातर्मध्याह्नसमये सायाह्ने प्रपठेद्यदि ॥ २२॥
    सर्वार्थसिद्धिस्तस्य स्याद्यन्मनसि वर्तते ।
    राजद्वारे सभायां च सङ्ग्रामे शत्रुसङ्कटे ॥ २३॥
    प्राणार्थनाशसमये यः पठेत्प्रयतो नरः ।
    तस्य सिद्धिर्भवेद्देवि न भयं विद्यते क्वचित् ॥ २४॥
    आराधिता राधिका च तेन सत्यं न संशयः ।
    गङ्गास्नानाद्धरेर्नामग्रहणाद्यत्फलं लभेत् ॥ २५॥
    तत्फलं तस्य भवति यः पठेत्प्रयतः शुचिः ।
    हरिद्रारोचनाचन्द्रमण्डितं हरिचन्दनम् ॥ २६॥
    कृत्वा लिखित्वा भूर्जे च धारयेन्मस्तके भुजे ।
    कण्ठे वा देवदेवेशि स हरिर्नात्र संशयः ॥ २७॥
    कवचस्य प्रसादेन ब्रह्मा सृष्टिं स्थितिं हरिः ।
    संहारं चाहं नियतं करोमि कुरुते तथा ॥ २८॥
    वैष्णवाय विशुद्धाय विरागगुणशालिने ।
    दद्यात्कवचमव्यग्रमन्यथा नाशमाप्नुयात् ॥ २९॥
    ॥ इति श्रीनारदपञ्चरात्रे ज्ञानामृतसारे राधाकवचं सम्पूर्णम् ॥

  • 1:11 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    ॥ श्री राधाष्टकम् ॥ (Shri Radhashtakam)

    ॐ दिशिदिशिरचयन्तीं सञ्चयन्नेत्रलक्ष्मीं,
    विलसितखुरलीभिः खञ्जरीटस्य खेलाम् ।
    हृदयमधुपमल्लीं वल्लवाधीशसूनो-,
    रखिलगुणगभीरां राधिकामर्चयामि ॥
    पितुरिह वृषभानो रत्नवायप्रशस्तिं,
    जगति किल सयस्ते सुष्ठु विस्तारयन्तीम् ।
    व्रजनृपतिकुमारं खेलयन्तीं सखीभिः,
    सुरभिनि निजकुण्डे राधिकामर्चयामि ॥
    शरदुपचितराकाकौमुदीनाथकीर्त्ति-,
    प्रकरदमनदीक्षादक्षिणस्मेरवक्त्राम् ।
    नटयदभिदपाङ्गोत्तुङ्गितानं गरङ्गां,
    वलितरुचिररङ्गां राधिकामर्चयामि ॥
    विविधकुसुमवृन्दोत्फुल्लधम्मिल्लधाटी-,
    विघटितमदघृर्णात्केकिपिच्छुप्रशस्तिम् ।
    मधुरिपुमुखबिम्बोद्गीर्णताम्बूलराग-,
    स्फुरदमलकपोलां राधिकामर्चयामि ॥
    नलिनवदमलान्तःस्नेहसिक्तां तरङ्गा-,
    मखिलविधिविशाखासख्यविख्यातशीलाम् ।
    स्फुरदघभिदनर्घप्रेममाणिक्यपेटीं,
    धृतमधुरविनोदां राधिकामर्चयामि ॥
    अतुलमहसिवृन्दारण्यराज्येभिषिक्तां,
    निखिलसमयभर्तुः कार्तिकस्याधिदेवीम् ।
    अपरिमितमुकुन्दप्रेयसीवृन्दमुख्यां,
    जगदघहरकीर्तिं राधिकामर्चयामि ॥
    हरिपदनखकोटीपृष्ठपर्यन्तसीमा-,
    तटमपि कलयन्तीं प्राणकोटेरभीष्टम् ।
    प्रमुदितमदिराक्षीवृन्दवैदग्ध्यदीक्षा-,
    गुरुमपि गुरुकीर्तिं राधिकामर्चयामि ॥
    अमलकनकपट्टीदृष्टकाश्मीरगौरीं,
    मधुरिमलहरीभिः सम्परीतां किशोरीम् ।
    हरिभुजपरिरब्ध्वां लघ्वरोमाञ्चपालीं,
    स्फुरदरुणदुकूलां राधिकामर्चयामि ॥
    तदमलमधुरिम्णां काममाधाररूपं,
    परिपठति वरिष्ठं सुष्ठु राधाष्टकं यः ।
    अहिमकिरणपुत्रीकूलकल्याणचन्द्रः,
    स्फुटमखिलमभीष्टं तस्य तुष्टस्तनोति ॥
    ॥ इति श्रीराधाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

  • 12:13 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    राधा जी के 108 नाम (Radha ji 108 names)

    1. ॐ श्रीराधायै नम:
    2. ॐ राधिकायै नम:
    3. ॐ जीवायै नम:
    4. ॐ जीवानन्दप्रदायिन्यै नम:
    5. ॐ नन्दनन्दनपत्न्यै नम:
    6. ॐ वृषभानुसुतायै नम:
    7. ॐ शिवायै नम:
    8. ॐ गणाध्यक्षायै नम:
    9. ॐ गवाध्यक्षायै नम:
    10. ॐ जगन्नाथप्रियायै नम:
    11. ॐ किशोर्यै नम:
    12. ॐ कमलायै नम:
    13. ॐ कृष्णवल्लभायै नम:
    14. ॐ कृष्णसंयुतायै नम:
    15. ॐ वृन्दावनेश्वर्यै नम:
    16. ॐ कृष्णप्रियायै नम:
    17. ॐ मदनमोहिन्यै नम:
    18. ॐ श्रीमत्यै कृष्णकान्तायै नम:
    19. ॐ कृष्णानन्दप्रदायिन्यै नम:
    20. ॐ यशस्विन्यै नम:
    21. ॐ यशोगम्यायै नम:
    22. ॐ यशोदानन्दवल्लभायै नम:
    23. ॐ दामोदरप्रियायै नम:
    24. ॐ गोकुलानन्दकर्त्र्यै नम:
    25. ॐ गोकुलानन्ददायिन्यै नम:
    26. ॐ गतिप्रदायै नम:
    27. ॐ गीतगम्यायै नम:
    28. ॐ गमनागमनप्रियायै नम:
    29. ॐ विष्णुप्रियायै नम:
    30. ॐ विष्णुकान्तायै नम:
    31. ॐ विष्णोरंकनिवासिन्यै नम:
    32. ॐ यशोदानन्दपत्न्यै नम:
    33. ॐ यशोदानन्दगेहिन्यै नम:
    34. ॐ कामारिकान्तायै नम:
    35. ॐ कामेश्यै नम:
    36. ॐ कामलालसविग्रहायै नम:
    37. ॐ जयप्रदायै नम:
    38. ॐ जयायै नम:
    39. ॐ गोप्यै नम:
    40. ॐ गोपानन्दकर्यै नम:
    41. ॐ कृष्णांगवासिन्यै नम:
    42. ॐ हृद्यायै नम:
    43. ॐ चित्रमालिन्यै नम:
    44. ॐ विमलायै नम:
    45. ॐ दु:खहन्त्र्यै नम:
    46. ॐ मत्यै नम:
    47. ॐ धृत्यै नम:
    48. ॐ लज्जायै नम:
    49. ॐ कान्त्यै नम:
    50. ॐ पुष्टयै नम:
    51. ॐ गोकुलत्वप्रदायिन्यै नम:
    52. ॐ केशवायै नम:
    53. ॐ केशवप्रीतायै नम:
    54. ॐ रासक्रीडाकर्यै नम:
    55. ॐ रासवासिन्यै नम:
    56. ॐ राससुन्दर्यै नम:
    57. ॐ हरिकान्तायै नम:
    58. ॐ हरिप्रियायै नम:
    59. ॐ प्रधानगोपिकायै नम:
    60. ॐ गोपकन्यायै नम:
    61. ॐ त्रैलोक्यसुन्दर्यै नम:
    62. ॐ वृन्दावनविहारिण्यै नम:
    63. ॐ विकसितमुखाम्बुजायै नम:
    64. ॐ पद्मायै नम:
    65. ॐ पद्महस्तायै नम:
    66. ॐ पवित्रायै नम:
    67. ॐ सर्वमंगलायै नम:
    68. ॐ कृष्णकान्तायै नम:
    69. ॐ विचित्रवासिन्यै नम:
    70. ॐ वेणुवाद्यायै नम:
    71. ॐ वेणुरत्यै नम:
    72. ॐ सौम्यरूपायै नम:
    73. ॐ ललितायै नम:
    74. ॐ विशोकायै नम:
    75. ॐ विशाखायै नम:
    76. ॐ लवंगनाम्न्यै नम:
    77. ॐ कृष्णभोग्यायै नम:
    78. ॐ चन्द्रवल्लभायै नम:
    79. ॐ अर्द्धचन्द्रधरायै नम:
    80. ॐ रोहिण्यै नम:
    81. ॐ कामकलायै नम:
    82. ॐ बिल्ववृक्षनिवासिन्यै नम:
    83. ॐ बिल्ववृक्षप्रियायै नम:
    84. ॐ बिल्वोपमस्तन्यै नम:
    85. ॐ तुलसीतोषिकायै नम:
    86. ॐ गजमुक्तायै नम:
    87. ॐ महामुक्तायै नम:
    88. ॐ महामुक्तिफलप्रदायै नम:
    89. ॐ प्रेमप्रियायै नम:
    90. ॐ प्रेमरुपायै नम:
    91. ॐ प्रेमभक्तिप्रदायै नम:
    92. ॐ प्रेमक्रीडापरीतांग्यै नम:
    93. ॐ दयारुपायै नम:
    94. ॐ गौरचन्द्राननायै नम:
    95. ॐ कलायै नम:
    96. ॐ शुकदेवगुणातीतायै नम:
    97. ॐ शुकदेवप्रियायै सख्यै नम:
    98. ॐ रतिप्रदायै नम:
    99. ॐ चैतन्यप्रियायै नम:
    100. ॐ सखीमध्यनिवासिन्यै नम:
    101. ॐ मथुरायै नम:
    102. ॐ श्रीकृष्णभावनायै नम:
    103. ॐ पतिप्राणायै नम:
    104. ॐ पतिव्रतायै नम:
    105. ॐ सकलेप्सितदात्र्यै नम:
    106. ॐ कृष्णभार्यायै नम:
    107. ॐ श्यामसख्यै नम:
    108. ॐ कल्पवासिन्यै नम:
  • 11:48 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    || श्री राधा स्तुति || (Shri Radha Stuti)

    नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनी।
    रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये।।
    नमस्त्रैलोक्यजननि प्रसीद करुणार्णवे।
    ब्रह्मविष्ण्वादिभिर्देवैर्वन्द्यमान पदाम्बुजे।।
    नम: सरस्वतीरूपे नम: सावित्रि शंकरि।
    गंगापद्मावनीरूपे षष्ठि मंगलचण्डिके।।
    नमस्ते तुलसीरूपे नमो लक्ष्मीस्वरुपिणी।
    नमो दुर्गे भगवति नमस्ते सर्वरूपिणी।।
    मूलप्रकृतिरूपां त्वां भजाम: करुणार्णवाम्।
    संसारसागरादस्मदुद्धराम्ब दयां कुरु।।
    || इति सम्पूर्ण श्री राधा स्तुति ||

  • 10:56 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Radha Chalisa: राधा चालीसा

  • 9:45 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Radha Rani Aarti Video: राधा जी की आरती

  • 9:06 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Shri Radha Chalisa Lyrics: राधा चालीसा

    ॥ दोहा ॥

    श्री राधे वृषभानुजा,भक्तनि प्राणाधार।

    वृन्दाविपिन विहारिणि,प्रणवौं बारंबार॥

    जैसौ तैसौ रावरौ,कृष्ण प्रिया सुखधाम।

    चरण शरण निज दीजिये,सुन्दर सुखद ललाम॥

    ॥ चौपाई ॥

    जय वृषभानु कुँवरि श्री श्यामा।कीरति नंदिनी शोभा धामा॥

    नित्य विहारिनि श्याम अधारा।अमित मोद मंगल दातारा॥

    रास विलासिनि रस विस्तारिनि।सहचरि सुभग यूथ मन भावनि॥

    नित्य किशोरी राधा गोरी।श्याम प्राणधन अति जिय भोरी॥

    करुणा सागर हिय उमंगिनी।ललितादिक सखियन की संगिनी॥

    दिन कर कन्या कूल विहारिनि।कृष्ण प्राण प्रिय हिय हुलसावनि॥

    नित्य श्याम तुमरौ गुण गावैं।राधा राधा कहि हरषावैं॥

    मुरली में नित नाम उचारें।तुव कारण लीला वपु धारें॥

    प्रेम स्वरूपिणि अति सुकुमारी।श्याम प्रिया वृषभानु दुलारी॥

    नवल किशोरी अति छवि धामा।द्युति लघु लगै कोटि रति कामा॥

    गौरांगी शशि निंदक बदना।सुभग चपल अनियारे नयना॥

    जावक युत युग पंकज चरना।नूपुर धुनि प्रीतम मन हरना॥

    संतत सहचरि सेवा करहीं।महा मोद मंगल मन भरहीं॥

    रसिकन जीवन प्राण अधारा।राधा नाम सकल सुख सारा॥

    अगम अगोचर नित्य स्वरूपा।ध्यान धरत निशिदिन ब्रज भूपा॥

    उपजेउ जासु अंश गुण खानी।कोटिन उमा रमा ब्रह्मानी॥

    नित्य धाम गोलोक विहारिनि।जन रक्षक दुख दोष नसावनि॥

    शिव अज मुनि सनकादिक नारद।पार न पाँइ शेष अरु शारद॥

    राधा शुभ गुण रूप उजारी।निरखि प्रसन्न होत बनबारी॥

    ब्रज जीवन धन राधा रानी।महिमा अमित न जाय बखानी॥

    प्रीतम संग देइ गलबाँही।बिहरत नित वृन्दावन माँही॥

    राधा कृष्ण कृष्ण कहैं राधा।एक रूप दोउ प्रीति अगाधा॥

    श्री राधा मोहन मन हरनी।जन सुख दायक प्रफुलित बदनी॥

    कोटिक रूप धरें नंद नंदा।दर्श करन हित गोकुल चन्दा॥

    रास केलि करि तुम्हें रिझावें।मान करौ जब अति दुःख पावें॥

    प्रफुलित होत दर्श जब पावें।विविध भांति नित विनय सुनावें॥

    वृन्दारण्य विहारिनि श्यामा।नाम लेत पूरण सब कामा॥

    कोटिन यज्ञ तपस्या करहू।विविध नेम व्रत हिय में धरहू॥

    तऊ न श्याम भक्तहिं अपनावें।जब लगि राधा नाम न गावें॥

    वृन्दाविपिन स्वामिनी राधा।लीला वपु तब अमित अगाधा॥

    स्वयं कृष्ण पावैं नहिं पारा।और तुम्हें को जानन हारा॥

    श्री राधा रस प्रीति अभेदा।सादर गान करत नित वेदा॥

    राधा त्यागि कृष्ण को भजिहैं।ते सपनेहु जग जलधि न तरि हैं॥

    कीरति कुँवरि लाड़िली राधा।सुमिरत सकल मिटहिं भवबाधा॥

    नाम अमंगल मूल नसावन।त्रिविध ताप हर हरि मनभावन॥

    राधा नाम लेइ जो कोई।सहजहि दामोदर बस होई॥

    राधा नाम परम सुखदाई।भजतहिं कृपा करहिं यदुराई॥

    यशुमति नन्दन पीछे फिरिहैं।जो कोऊ राधा नाम सुमिरिहैं॥

    रास विहारिनि श्यामा प्यारी।करहु कृपा बरसाने वारी॥

    वृन्दावन है शरण तिहारी।जय जय जय वृषभानु दुलारी॥

    ॥ दोहा ॥

    श्रीराधा सर्वेश्वरी,रसिकेश्वर घनश्याम।

    करहुँ निरंतर बास मैं,श्रीवृन्दावन धाम॥

  • 8:13 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    राधा अष्टमी पूजा सामग्री (Radha Ashtami Puja Samagri)

    • पूजा स्थल पर स्वच्छ चौकी व लाल या पीला वस्त्र
    • राधा-कृष्ण की प्रतिमा या चित्र और राधा रानी की पोशाक
    • जल कलश व आचमन के लिए चम्मच
    • पान, सुपारी, लौंग, इलायची
    • शुद्ध घी का दीपक और रूई की बत्तियां
    • आरती की थाली व घंटी
    • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
    • फूल (विशेषकर लाल और पीले) व माला
    • तुलसी दल
    • सुगंधित धूप
    • दीपक
    • घी/तेल
    • सिंदूर, हल्दी
    • कुमकुम, अक्षत 
  • 7:54 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Radha Ashtami Ka Vrat Kaise Kiya Jata Hai (राधा रानी का व्रत कैसे किया जाता है)

    • अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
    • स्वच्छ वस्त्र पहनें और राधा-कृष्ण की पूजा का संकल्प लें।
    • पूरे दिन व्रत रखें।
    • फलाहार या केवल जल ग्रहण कर सकते हैं, परंतु अधिकतर लोग निराहार रहकर व्रत करते हैं।
    • घर या मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
    • पूजा स्थल को फूलों, दीपक और धूप से सजाएँ।
    • पहले भगवान गणेश की पूजा करें।
    • फिर राधा-कृष्ण का अभिषेक करें।
    • पुष्प, चंदन, वस्त्र, आभूषण, फल और मिठाई अर्पित करें।
    • राधा जी को गुलाब और कमल के फूल अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।
    • दिनभर राधा-कृष्ण के भजन गाएँ, नामस्मरण करें और कथा सुनें।
    • राधा स्तुति या राधा मंत्र का जाप करें।
    • राधा जन्म कथा का श्रवण करें।
    • दिन के अंत में जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन का दान दें।
    • शाम को आरती करके व्रत का समापन करें।
    • अगले दिन प्रातःकाल ब्राह्मण या कन्याओं को भोजन कराकर व्रत पूर्ण करें।
  • 7:41 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    राधा रानी की आरती (Radha Rani Ki Aarti In Hindi)

    राधारानी तेरी आरती गाऊँ,

    भानु दुलारी तेरी आरती गाऊँ,

    आरती गाऊँ मैं तो वारि वारि जाऊँ,

    आरती गाऊँ तोपे वारि वारि जाऊँ॥

    कीरत लाली तेरी आरती गाऊँ,

    श्यामा प्यारी तेरी आरती गाऊँ,

    आरती गाऊँ मैं तो वारि वारि जाऊँ,

    आरती गाऊँ तोपे वारि वारि जाऊँ॥

    बरसाने वाली तेरी आरती गाऊँ,

    राधारानी तेरी आरती गाऊँ।

    बरसाने की ऊँची अटारी,

    छवि श्यामा की लागे अति प्यारी,

    श्रीजी छवि पे बलि बलि जाऊँ,

    राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

    लाडली तुम हो ब्रज की महारानी,

    महिमा तुम्हरी जाये ना बखानी,

    ब्रजधाम में वास मैं पाऊँ,

    राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

    कृष्ण हैं मिलते जिसके नाम से,

    जपते हैं सब बड़े ही भाव से,

    राधे राधे गा के तुमको मनाऊँ,

    राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

    राधा नाम की अर्जी लगाकर,

    बरसाना मंदिर में आकर,

    संतन संग राधा गुण गाऊँ,

    राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

    भोरी भोरी नवल किशोरी,

    कारे कान्हा राधा गोरी,

    चरणों में जिनके मैं शीश झुकाऊँ,

    राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

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