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सावन का अंतिम प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा? जान लीजिए सही डेट और पूजा का शुभ मुहूर्त

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Aug 19, 2026 03:29 pm IST,  Updated : Aug 19, 2026 03:31 pm IST

सावन में आने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत को करने से शुभ और पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं कि सावन का आखिरी प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा।

सावन प्रदोष व्रत 2026- India TV Hindi
सावन प्रदोष व्रत 2026 Image Source : PEXELS

सावन का महीना और प्रदोष व्रत दोनों ही भगवान शिव को समर्पित है। सावन का महीना महादेव की भक्ति के लिए अति उत्तम माना जाता है। ऐसे में सावन में आने वाले प्रदोष व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। वहीं आपको बता दें कि हर माह में दो बार प्रदोष का व्रत आता है। एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष का व्रत रखा जाता है। सावन प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना और उपवास करने से भक्तों को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं कि सावन का अंतिम प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

सावन प्रदोष व्रत 2026 डेट

पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 25 अगस्त को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि का समापन 26 अगस्त को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर होगा। सावन का अंतिम प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। बता दें कि जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है तब उसे भौम प्रदोष कहा जाता है।

सावन प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

भौम प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 59 मिनट से आरंभ होगा और रात 9 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगा। वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से सुबह 5 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से दोपहर 1 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त 2 बजकर 47 मिनट से आरंभ होगा और इसका समापन दोपहर 3 बजकर 37 मिनट पर होगा।  प्रदोष व्रत का निशिता मुहूर्त देर रात 12:01 ए एम से लेकर 26 अगस्त को 12:45 ए एम तक रहेगा।

भौम प्रदोष व्रत का महत्व 

भौम प्रदोष को मंगल प्रदोष भी कहा जाता है। भौम प्रदोष का व्रत करने कर्ज से छुटकारा मिलता है और भूमि-भवन संबंधित विवादों का भी समाधान निकल जाता है। भौम प्रदोष के दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा करने का भी विधान है। भौम प्रदोष व्रत का व्रत करने से मंगल दोष दूर होता है और आर्थिक, शारीरिक परेशानियां भी शीघ्र दूर हो जाती हैं। प्रदोष का व्रत करने से संतान की प्राप्ति भी होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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