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इन 3 आरती के बिना अधूरी है शरद पूर्णिमा की पूजा, मां लक्ष्मी, विष्णु जी और चंद्रदेव की कृपा से घर में आएगी सुख-समृद्धि

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Oct 25, 2026 01:32 pm IST,  Updated : Oct 25, 2026 01:32 pm IST

शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही इस दिन चंद्र देव की पूजा करने का भी विधान है। तो आज लक्ष्मी-विष्णु जी के साथ चंद्र देव की भी आरती जरूर करें।

शरद पूर्णिमा के दिन करें ये आरती- India TV Hindi
शरद पूर्णिमा के दिन करें ये आरती Image Source : PINTEREST

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है। वर्ष भर की सभी पूर्णिमाओं में इसे सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस रात की चांदनी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। इसके अलावा इसी पावन रात माता लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं। शरद पूर्णिमा की रात विधि-विधान से पूजा करने के साथ-साथ मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की आरती भी की जाती है। कहा जाता है कि इन तीन आरतियों के बिना शरद पूर्णिमा का व्रत और पूजा अधूरी मानी जाती है।

लक्ष्मी माता की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता।

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।

सब सम्भव हो जाता,मन नहीं घबराता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते,वस्त्र न कोई पाता।

खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर,क्षीरोदधि-जाता।

रत्न चतुर्दश तुम बिन,कोई नहीं पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती,जो कोई जन गाता।

उर आनन्द समाता,पाप उतर जाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

॥ विष्णु जी की आरती ॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।

स्वामी दुःख विनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ॐ जय जगदीश हरे।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।

स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

स्वामी तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

स्वामी तुम पालन-कर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

स्वामी सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ॐ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

स्वामी तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।

स्वमी पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे।

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

स्वामी जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

चंद्र देव की आरती 

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।

दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।।

रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।

दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी।।

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।

सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।।

योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा।।

वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।

प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।।

शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।

धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे।।

विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।

सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें।।

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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