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Shardiya Navratri 2022: नवरात्र का दूसरा दिन, यहां जानिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र

 Written By: Acharya Indu Prakash Edited By: Sushma Kumari
 Published : Sep 26, 2022 05:06 pm IST,  Updated : Sep 28, 2022 04:32 pm IST

Shardiya Navratri 2022 Maa Brahmacharini Puja: शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन माता दुर्गा के दूसरे स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है। आइए जानते हैं देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र के बारे में।

Shardiya Navratri 2022- India TV Hindi
Shardiya Navratri 2022 Image Source : INDIA TV

Highlights

  • नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है।
  • देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने वाले व्यक्ति को अपने हर कार्य में जीत हासिल होती है।

Shardiya Navratri 2022 Maa Brahmacharini Puja:​  शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन माता दुर्गा के दूसरे स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है। यहां 'ब्रह्म' शब्द का अर्थ तपस्या से है और 'ब्रह्मचारिणी' का अर्थ है- तप का आचरण करने वाली। देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने वाले व्यक्ति को अपने हर कार्य में जीत हासिल होती है। वह सर्वत्र विजयी होती है। सफेद वस्त्र धारण किए हुए मां ब्रह्मचारिणी के दो हाथों में से दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति के अंदर जप-तप की शक्ति बढ़ती है। मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को संदेश देती हैं कि परिश्रम से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। कहा जाता है कि नारद जी के उपदेश से मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या की थी। इसलिए इन्हें तपश्चारिणी भी कहा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी कई हजार वर्षों तक जमीन पर गिरे बेलपत्रों को खाकर भगवान शंकर की आराधना करती रहीं और बाद में उन्होंने पत्तों को खाना भी छोड़ दिया, जिससे उनका एक नाम अपर्णा भी पड़ा।

इस तरह करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को आपने कलश में आमंत्रित किया है। उन्हें पंचामृत स्नान दूध, दही, घृत, मेवे और शहद से स्नान कराएं। इसके बाद इन पर फूल, अक्षत, रोली, चंदन का भोग लगाएं। इसके बाद पान, सुपारी और कुछ दक्षिणा रखकर पंडित को दान करें। इसके बाद अपने हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करते हुए बार-बार मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी को सिर्फ लाल रंग का ही फूल चढ़ाए साथ ही कमल से बना हुआ ही माला पहनाएं। मां को चीनी का भोग लगाएं। ऐसा करने से मां जल्द ही प्रसन्न होती है। इसके बाद भगवान शिव जी की पूजा करें और फिर ब्रह्मा जी के नाम से जल, फूल, अक्षत आदि हाथ में लेकर 'ऊं ब्रह्मणे नम:' कहते हुए इसे भूमि पर रखें।

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शारदीय नवरात्रि शुभ मुहूर्त
द्वितीया तिथि की शुरुआत 27 सितंबर को 03:09 AM से ही रही है, जोकि अगले दिन 28 सितंबर को  02:28 AM तक है। 

इन मंत्रों का करें जाप 
अगर आप भी किसी कार्य में अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो इस दिन आपको देवी ब्रह्मचारिणी के इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। देवी ब्रह्मचारिणी का मंत्र इस प्रकार है- 'ऊं ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:' आपको इस मंत्र का कम से कम एक माला, यानी 108 बार जाप करना चाहिए। इससे विभिन्न कार्यों में आपकी जीत सुनिश्चित होगी। 

ब्रह्मचारिणी देवी का मंत्र
देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय हाथों में एक लाल फूल लेकर देवी का ध्यान करें और हाथ जोड़ते हुए प्रार्थना करते हुए मंत्र का उच्चारण करें।

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श्लोक
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥
परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

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