Navratri Katha: जानिए सबसे पहले किसने रखा था नवरात्रि में 9 दिन का व्रत, जानिए पूरी कथा

Shardiya Navratri 2022: क्या आप जानते हैं कि साल में 4 बार नवरात्रि का पर्व आता है। सभी का अलग-अलग महत्व है। यहां जानिए क्या है नवरात्रि पर्व की कथा।

Ritu Tripathi Written By: Ritu Tripathi @ritu_vishwanath
Updated on: September 27, 2022 11:53 IST
Navratri Katha 2022- India TV Hindi
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Navratri Katha: 26 सितंबर यानी आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। यह नवरात्रि काफी शुभ फल देने वाली है क्योंकि इस साल माता रानी हाथी पर सवार होकर आई हैं। नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों को पूजा जाता है।  इन नौ दिन आप माता की सच्चे मन से पूजा अर्चना कर अपने घर से सारी नकारात्मकता और जीवन की सारी बाधाओं को खत्म कर सकते हैं। मान्यता है कि नवरात्र के दिनों में पूजा-पाठ से जीवन की तमाम बाधाएं दूर होती हैं। नवरात्र के इन नौ दिनों में दुर्गा मां के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। क्या आप जानते हैं कि साल में 4 बार नवरात्रि का पर्व आता है। सभी का अलग-अलग महत्व है। यहां जानिए क्या है नवरात्रि पर्व की कथा। 

ये हैं साल की 4 नवरात्रि 

हिंदू धर्म में मान्यता है कि एक साल में कुल चार नवरात्रि होती हैं। जिनमें से दो गुप्त नवरात्रि होती हैं, माघ और आषाढ़ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। वहीं मुख्य रूप से दो नवरात्रि- चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि मनाई जाती हैं। इन दोनों उत्सवों को बड़ी संख्या में लोग मनाते हैं कई सामाजिक और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इन दोनों में से भी शारदीय नवरात्रि के मौके पर पूरे देश में उत्सव का माहौल होता है। क्योंकि इस दौरान श्रद्धालु कई जगह मां दुर्गा के प्रतिमा की स्थापना करते हैं और उनकी विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं। इसके साथ ही कई जगह इस मौके पर डांडिया होता है, गुजरात में लोक मान्यता है कि डांडिया करने से माता प्रसन्न होती हैं। 

व्रत और जगराते की है परंपरा 

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने और व्रत रखा जाता है। कई जगह लोग जगराते करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान माता रानी धरती पर आती है और नौ दिन अपने भक्तों के साथ धरती पर वास करती हैं। इस दिनों में वह भक्तों की हर मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।   

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नवरात्रि व्रत की कथा 

यह सवाल कई लोगों के मन में आता होगा कि नवरात्रि का व्रत कब और किसने शुरू किया? तो बता दें कि हिंदू धर्म के वाल्मिकी पुराण में इस व्रत का महत्व बताया गया है। श्री देवी महापुराण (दुर्गा पुराण) के अनुसार भी एक कथा प्रचलित है। आज हम आपको ये दोनों कथाएं बताने जा रहे हैं। 

वाल्मिकि पुराण में वर्णित कथा- सबसे पहले भगवान श्रीराम ने ऋष्यमूक पर्वत पर आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक परमशक्ति महिषासुरमरदिनी देवी दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की थी। इसके बाद दशमी तिथि के दिन उन्होंने किष्किंधा पर्वत से लंका जा कर राक्षस रावण का वध किया था। इस पूजा के दौरान भगवान श्रीराम ने माता देवी से अध्यात्मिक बल की प्राप्ति, शत्रु पराजय व कामना पूर्ति के का आर्शीवाद लिया था। यह बात त्रेतायुग की है, इस प्रकार नवरात्रि का व्रत सबसे पहले भगवान श्री राम ने शुरू किया था।

क्या है श्री देवी महापुराण (दुर्गा पुराण) की कथा- एक बार बृहस्पतिजी और ब्रह्माजी के बीच चर्चा हो रही थी। इस दौरान बृहस्पतिजी ने ब्रह्माजी से नवरात्रि व्रत के महत्व और फल के बारे में पूछा। इसके जवाब में ब्रह्माजी ने बताया-हे बृहस्पते! प्राचीन काल में मनोहर नगर में पीठत नाम का एक अनाथ ब्राह्मण रहता था। पीठत मां दुर्गा का सच्चा भक्त था। उसके घर सुमति नाम की कन्या ने जन्म लिया था। पीठत हर दिन मां दुर्गा की पूजा करके हवन किया करता था। इस दौरान उसकी बेटी उपस्थित रहती थी। एक दिन सुमति पूजा के दौरान मौजूद नहीं थी। वह सहेलियों के साथ खेलने चली गई। इस पर पीठत को गुस्सा आया और उसने पुत्री सुमति को चेतावनी दी कि उसका विवाह किसी कुष्ठ रोगी या दरिद्र मनुष्य के साथ करवाएगा। ‌पिता की ये बात सुनकर सुमति आहत हुई और उसने कहा- हे पिता! आपकी जैसी इच्छा हो वैसा ही करो। जो मेरे भाग्य में लिखा होगा, वही होगा। सुमति की यह बात सुनकर पीठत को और ज्यादा गुस्सा आया और उसने पुत्री का विवाह एक कुष्ट रोगी के साथ करा दी। इसके साथ ही पीठत ने अपनी पुत्री से कहा कि देखता हूं भाग्य के भरोसे रहकर क्या करती हो? 

इसके बाद सुमति अपने पति के साथ वन में चली गई। उसकी दयनीय स्थिति देखकर मां भगवती प्रकट हुईं और कहा कि मैं तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्मों से प्रसन्न हूं। इसलिए जो भी वरदान चाहिए मांग लो। इस पर सुमति ने मां भगवती से पूछा कि उसने पूर्व जन्म में ऐस क्या किया है? जवाब में मां भगवती ने कहा कि पूर्व जन्म में सुमति निषाद (भील) की स्त्री और पतिव्रता थी। एक दिन तुम्हारा पति चोरी की वजह से पकड़ा गया। इसके बाद सिपाहियों ने तुम दोनों पति-पत्नी को जेलखाने में कैद कर दिया। तुम दोनों को जेल में भोजन भी नहीं दिया गया। तुमने नवरात्र के दिनों में न तो कुछ खाया और न जल ही पिया। इस तरह नौ दिन तक नवरात्र का व्रत हो गया। मां भगवती ने आगे कहा कि तुम्हारे उसी व्रत के प्रभाव से प्रसन्न होकर मैं तुझे मनोवांछित वर देती हूं, तुम्हारी जो इच्छा हो सो मांगो।

इसके बाद सुमति ने मां भगवती से कहा- हे मां दुर्गे। मैं आपको प्रणाम करती हूं। आपसे विनति है कि मेरे पति के कुष्ट को दूर कर दीजिए। माता ने सुमति की मनोकामना पूरी कर दी। इसके बाद सुमति ने मां भगवती की अराधना की। प्रसन्न होकर मां भगवती ने कहा कि तुम्हें उदालय नामक अति बुद्धिमान, धनवान, कीर्तिवान और जितेन्द्रिय पुत्र होगा। 

इसके बाद मां भगवति इस पर मां भगवती ने अपने भक्तों को बताया कि जो भी चैत्र या अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से 9 दिन तक व्रत रहेगा और घट स्थापना करने के बाद, विधि अनुसार पूजा करेगा। उस पर मेरी कृपा बनी रहेगी। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। INDIA TV इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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