Viral Post : ट्रेन में सफर करते समय कई बार ऐसे बच्चे मिल जाते हैं जो काफी शरारती होते हैं। बच्चों की शरारत से कई बार यात्रियों को परेशानी भी होती है। 'बच्चे तो शरारत करते ही हैं...' इस भाव से कई लोग संकोच में उन्हें रोक नहीं पाते और परेशानी झेलते रहते हैं। हालांकि, एक यात्री ने सोशन मीडिया पर इस बात पर नाराजगी जताई कि बच्चे को शरारत करते देख भी उसके मात—पिता सामान्य तरह से बैठे रहे और उन्होंने एक बार भी बच्चे को नहीं संभाला। शख्स ने सोशल मीडिया पर अपने जीवन के "सबसे खराब ट्रेन यात्रा अनुभव" का जिक्र किया है, और इंटरनेट पर इस बारे में बहुत कुछ कहा जा रहा है।
एक्स पर पोस्ट हुई वायरल
इस पोस्ट को एक्स पर @AjayKumaarJi नामक हैंडल से शेयर किया गया। इस पोस्ट में यात्री ने दावा किया कि, उसे खिड़की वाली सीट मिली थी, लेकिन उसके बगल में बैठा 3-4 साल का बच्चा कथित तौर पर उसे बार-बार लात मारता रहा, उस पर गिरता रहा और यात्रा के दौरान उसकी चाय लगभग गिरा ही दी। उसे सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात पर आया कि बच्चे का पिता कथित तौर पर पूरी यात्रा के दौरान चुप रहा और उसने इस व्यवहार को रोकने की कोशिश भी नहीं की। यात्री ने बताया कि आगे वाली सीट पर बैठा एक बच्चा बार-बार सीट को पीछे की ओर धकेल रहा था, मानो कोई खेल खेल रहा हो। उसने दावा किया कि वह यात्रा के दौरान अपने लैपटॉप पर काम कर रहा था, और सीट के लगातार हिलने से कई बार उसके घुटनों पर चोट लगी, जिससे उसका लैपटॉप लगभग बंद हो गया था। पोस्ट में लिखा कि, 'मुझे सचमुच बच्चों के ट्रेन यात्रा का आनंद लेने से कोई आपत्ति नहीं है... लेकिन जब उनका व्यवहार सह-यात्रियों को असहज करने लगे, तो माता-पिता को कम से कम हस्तक्षेप करना चाहिए।'
ट्रेन के खाने की आलोचना की
यात्री ने सोशल मीडिया पर ट्रेन में परोसे जाने वाले भोजन की भी आलोचना की और दावा किया कि प्रीमियम ट्रेन के हिसाब से खाने की मात्रा बेहद कम थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने रेल सहायता के माध्यम से यह मुद्दा उठाया, लेकिन प्रबंधक ने यह कहकर शिकायत खारिज कर दी कि खाने का डिब्बा बड़ा था, इसलिए मात्रा में कोई समस्या नहीं थी। यूजर ने पोस्ट का अंत यह कहते हुए किया कि इस पूरे अनुभव ने उसका मूड पूरी तरह खराब कर दिया और माता-पिता का सामना करने की इच्छा होने के बावजूद, उसने पूरी यात्रा के दौरान चुप रहना ही बेहतर समझा।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने कमेंट सेक्शन में मिली-जुली प्रतिक्रियाओं की बाढ़ ला दी। एक यूजर ने लिखा कि, 'जब बच्चे दूसरों को परेशान करते हैं तो भारतीय माता-पिता का इस तरह से अनदेखी करना सचमुच बहुत आम बात है।' दूसरे ने लिखा कि, 'लोग शांति की उम्मीद में वंदे भारत की टिकट खरीदते हैं और अंत में उन्हें धैर्य की पूरी परीक्षा देनी पड़ती है।' तीसरे ने लिखा कि, 'सीट पर लात मारने वाले बच्चे भारतीय सार्वजनिक परिवहन के अनौपचारिक शुभंकर हैं।' हालांकि, कुछ यूजर्स ने संबंधित परिवारों का बचाव भी किया। एक टिप्पणी में लिखा था, 'लंबी यात्राओं के दौरान बच्चे स्वाभाविक रूप से इधर-उधर हिलते-डुलते हैं। सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से शांत नहीं हो सकता।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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