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Vat Savitri Vrat Niyam: पीरियड्स में वट सावित्री व्रत कैसे करें? जानिए पूजा के नियम और जरूरी बातें

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : May 15, 2026 06:31 pm IST,  Updated : May 15, 2026 06:31 pm IST

Vat Savitri Vrat Niyam: मासिक धर्म के दौरान वट सावित्री व्रत करने को लेकर महिलाओं में अक्सर भ्रम की स्थिति रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिलाएं इस दौरान मन से पूजा और व्रत का संकल्प ले सकती हैं, लेकिन इन कुछ नियमों को मानने की सलाह दी जाती है। जानिए पीरियड में वट सावित्री पूजा कैसे करना चाहिए।

Vat Savitri Vrat Niyam- India TV Hindi
पीरियड्स में वट सावित्री व्रत कैसे करें? Image Source : PTI

Vat Savitri Vrat Niyam: वट सावित्री व्रत शादीशुदा महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत रखती हैं। महिलाएं बड़े उत्साह से इस व्रत की तैयारियां करती हैं, लेकिन मन में यह सवाल उठता है कि अगर व्रत वाले दिन या उसके एक- दो दिन पहले पीरियड्स आ जाएं तो पूजा और उपवास करना चाहिए या नहीं। इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं। पीरियड में वट सावित्री पूजा कैसे करें? चलिए जानते हैं।

क्यों खास है वट सावित्री व्रत

वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं 16 शृंगार कर वट वृक्ष की पूजा करती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। यह व्रत सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा है, जिसे अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

पीरियड्स में व्रत रखें या नहीं?

मासिक धर्म के दौरान पूजा-पाठ को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। पारंपरिक तौर पर महिलाओं को इस दौरान पूजा से दूर रहने की सलाह दी जाती थी। हालांकि, अब कई धार्मिक विद्वान मानते हैं कि पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसमें मन से भगवान का स्मरण करने में कोई बाधा नहीं होती।

ऐसे कर सकती हैं पूजा

अगर किसी महिला को वट सावित्री व्रत के दिन पीरियड आ जाए, तो वह श्रद्धा के साथ व्रत का संकल्प ले सकती है। सुबह स्नान के बाद भगवान को प्रणाम करें और मन ही मन पूजा करें। हालांकि इस दौरान वट वृक्ष और पूजा सामग्री को सीधे स्पर्श करने से बचने की सलाह दी जाती है। महिलाएं किसी दूसरी व्रती महिला के माध्यम से पूजा करवा सकती हैं और कथा सुन सकती हैं।

परिवार की परंपरा का रखें ध्यान

हर परिवार की धार्मिक परंपराएं अलग होती हैं। ऐसे में महिलाओं को अपने घर की मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार फैसला लेना चाहिए। कई घरों में माहवारी के दौरान केवल मानसिक रूप से पूजा करने की परंपरा होती है, जबकि कुछ लोग सामान्य तरीके से व्रत करने की अनुमति देते हैं।

सेहत को न करें नजर अंदाज 

व्रत और पूजा का उद्देश्य पॉजिटिविटी और मानसिक शांति प्राप्त करना होता है। ऐसे में अगर मासिक धर्म के दौरान कमजोरी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस हो, तो खुद को ज्यादा कष्ट देना सही नहीं माना जाता। महिलाओं को इस दौरान शरीर की जरूरतों का ध्यान रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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