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Akshay Tritiya Vrat Katha: अक्षय तृतीया की कथा, दान और खरीदारी करने से पहले करें इसका पाठ, वरना अधूरा रह जाएगा पुण्य

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Apr 18, 2026 04:09 pm IST,  Updated : Apr 18, 2026 04:09 pm IST

Akshay Tritiya Vrat Katha: : अक्षय तृतीया पर व्रत कथा का पाठ करने से आपको त्रिदेवों और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस कथा का पाठ करने के बाद ही दान और खरीदारी करने का शुभ फल भी आप पाते हैं। आइए जान लेते हैं अक्षय तृतीया की व्रत कथा के बारे में।

Akshay Tritiya 2026- India TV Hindi
अक्षय तृतीया 2026 Image Source : FREEPIK

Akshay Tritiya Vrat Katha: अक्षय तृतीया का व्रत 19 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा। इस दिन व्रत के साथ ही दान-पुण्य और सोना-चांदी आदि की खरीदारी की जाती है। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, यानि इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि अक्षय तृतीया की खरीदारी करने और दान करने से पहले आपको सुबह पूजन करना चाहिए और नीचे दी गई कथा का पाठ करना चाहिए। इस कथा का पाठ करने के बाद ही आपको व्रत, दान और खरीदारी करने का शुभ परिणाम प्राप्त होता है। कथा का पाठ किए बिना पुण्य फलों की प्राप्ति में कमी आ सकती है। 

अक्षय तृतीया की व्रत कथा 

अक्षय तृतीया की कथा के अनुसार, प्राचीन काल में धर्मदास नाम का एक सदाचारी और गरीब वैश्य था। धर्मदास एक छोटे से गांव में अपने परिवार के साथ निवास करता था। अत्यंत गरीब होने के कारण परिवार का भरण-पोषण करने के लिए चिंता उसके मन में बनी रहती थी। हालांकि इसके बावजूद भी ईश्वर के प्रति उसकी अटूट श्रद्धा थी। 

एक बार धर्मदास ने अक्षय तृतीया व्रत के महात्म्य के बारे में सुना। इसके बाद जब अक्षय तृतीया तिथि आई तो उसने गंगा में स्नान करने के बाद देवी-देवताओं का विधि-पूर्वक पूजन किया। गरीब होने के बावजूद भी अक्षय तृतीया के दिन उसने घड़े, जौ, सत्तू, चावल, नमक, गेंहू, गुड़, घी, दही और सोने को पहले प्रभु के चरणों में अर्पित किआ और उसके बाद इसका दान कर दिया। यह दान उसने ब्राह्मणों को किया। धर्मदास को इतना अधिक दान करते देख घर के लोग चिंतित हो गए और उसकी पत्नी ने उसे रोकने की कोशिश की। पत्नी ने कहा कि इतना अधिक दान दोगे तो घर के लोगों का भरण-पोषण कैसे होगा। हालांकि धर्मदास ने पत्नी की बात नहीं सुनी और पूरी श्रद्धा के साथ ब्राह्मणों को दान किया। अपने पूरे जीवन काल में उसने हर अक्षय तृतीया पर इसी तरह दान किया। 

धर्मदास अपने पुण्य कर्मों के कारण अगले जन्म में एक प्रतापी राजा बना। राजा होने के साथ भी वो धर्म के मार्ग पर चलता रहा। माना जाता है कि यही राजा अगले जन्म में प्रसिद्ध सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के रूप में पैदा हुआ। यानि धर्मदास अपने पुण्य कर्मों के कारण आने वाले जन्मों में राज कुल में ही पैदा हुआ। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राजा के रूप में पैदा हुआ धर्मदास जब भी भव्य यज्ञ करवाता था तो देवता भी उसके यज्ञ में रूप बदलकर आते थे। त्रिदेवों के आशीर्वाद से ही धर्मदास को राज कुल की प्राप्ति हुई और वो एक प्रतापी राजा बना। इसी तरह जो भी व्यक्ति अक्षय तृतीया के दिन दान-पुण्य करता है और इस कथा का पाठ करता है उसपर भी देवी-देवताओं का आशीर्वाद बरसता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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