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इन दो आरतियों के बिना अधूरी है आपकी नवरात्रि पूजा, देखें जय अम्बे गौरी और अम्बे तू है जगदम्बे काली के लिरिक्स

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Mar 19, 2026 09:41 am IST,  Updated : Jul 14, 2026 02:12 pm IST

नवरात्रि में मां दुर्गा की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो उनकी दो खास आरतियों को करना बिल्कुल भी न भूलें। इन आरतियों से आप मां दुर्गा की तुरंत ही कृपा पा सकते हैं।

ambe Ji ki aarti- India TV Hindi
अंबे जी की आरती Image Source : CANVA

नवरात्रि में सुबह-शाम माता रानी की आरती करने का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं आरती के बिना पूजा अधूरी रह जाती है इसलिए हर पूजा-पाठ के अंत में आरती जरूर की जाती है। माता रानी की आरती को दुर्गा जी की आरती, अंबे माता की आरती, शेरावाली की आरती, नवरात्रि की आरती इत्यादि नामों से जाना जाता है। वैसे तो मां दुर्गा की कई आरतियां हैं लेकिन हम आपको उनकी दो ऐसी प्रमुख आरतियों के बारे में बताएंगे जो नवरात्रि में जरूर की जाती है। चलिए आपको बताते हैं माता की आरती के लिरिक्स।

Ambe Ji Ki Aarti (दुर्गा जी की आरती)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी..

माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी..

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी..

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी..

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी..

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी..

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी..

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी..

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी..

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी..

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी..

कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी..

श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌ई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी..

अंबे तू हे जगदम्बे काली आरती लिरिक्स (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti)

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

तेरे भक्तजनों पर,
भीड़ पडी है भारी मां ।
दानव दल पर टूट पड़ो,
माँ करके सिंह सवारी ।
सौ-सौ सिंहो से बलशाली,
अष्ट भुजाओ वाली,
दुष्टो को पल में संहारती ।
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

माँ बेटे का है इस जग मे,
बडा ही निर्मल नाता ।
पूत – कपूत सुने है पर न,
माता सुनी कुमाता ॥
सब पे करूणा बरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखियो के दुखड़े निवारती ।
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

नही मांगते धन और दौलत,
न चांदी न सोना मां ।
हम तो मांगे मां तेरे मन में,
इक छोटा सा कोना ॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को सवांरती ।
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

चरण शरण मे खड़े तुम्हारी,
ले पूजा की थाली ।
वरद हस्त सर पर रख दो,
मं सकंट हरने वाली ।
मं भर दो भक्ति रस प्याली,
अष्ट भुजाओ वाली,
भक्तो के कारज तू ही सारती ।
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

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