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Ast Grah Ka Prabhav: कुंडली में स्थित अस्त ग्रह का जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है? जानें

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Nov 12, 2025 07:07 pm IST,  Updated : Nov 12, 2025 07:07 pm IST

Ast Grah Ka Prabhav: कुंडली में ग्रहों की अलग स्थिति होती है कुछ ग्रह उदित होते हैं तो कुछ ग्रह अस्त, कुछ ग्रह वक्री होते हैं तो कुछ मार्गी। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि कुंडली में मौजूद अस्त ग्रह का आपके जीवन पर क्या प्रभाव देखने को मिलता है।

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अस्त ग्रह Image Source : CANVA

Ast Grah Ka Prabhav: कुंडली में ग्रहों की अलग-अलग स्थितियां होती हैं। कुछ ग्रह कुंडली में उच्च के हो सकते हैं तो वहीं कुछ नीच के, कुछ ग्रह उदित होते हैं तो कुछ ग्रह अस्त। इसी तरह कुछ ग्रह मार्गी होते हैं तो कुछ वक्री। ग्रह की इन विभिन्न स्थितियों में से एक ग्रह के अस्त होने के असर के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। आइए जान लेते हैं कि ग्रह अस्त कब होते हैं और इनका जीवन पर क्या प्रभाव देखने को मिल सकता है। 

कब अस्त होते हैं ग्रह?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट आ जाता है तो उसकी शक्ति क्षीण हो जाती है और ग्रह की इस स्थिति को अस्त होना कहा जाता है। अस्त के ग्रह अक्सर बलहीन हो जाते हैं और जीवन पर इनका प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि कुछ विशेष स्थितियों में ये शुभ भी साबित हो सकते हैं। 

ग्रहों के अस्त होने का प्रभाव 

बुध अस्त- अगर कुंडली में बुध ग्रह अस्त हो तो व्यक्ति संकोची स्वभाव का हो सकता है। अपनी बातों को रखने में डर सकता है। ऐसे लोगों की वाणी कर्कश और तीखी हो सकती है। साथ ही बौद्धिक क्षमता में भी कमी आ सकती है। 

शुक्र अस्त- इस ग्रह को प्रेम और भौतिकता का कारक माना जाता है। ऐसे में शुक्र के अस्त होने से प्रेम और वैवाहिक संबंध खराब हो सकते हैं। ऐसे लोगों में रचनात्मकता की कमी देखी जा सकती है, साथ ही भौतिक सुख प्राप्त करने में भी दिक्कतों का सामना इनको करना पड़ सकता है। 

मंगल अस्त- मंगल के अस्त होने से व्यक्ति में साहस और पराक्रम की कमी देखने को मिल सकती है। ऐसे लोग क्रोधी हो सकते हैं लेकिन अपने क्रोध को व्यक्त ये लोग अक्सर नहीं कर पाते। इनकी नेतृत्व क्षमता भी खराब हो सकती है। 

गुरु अस्त- गुरु ग्रह के अस्त होने से पारिवारिक सुख और संतान प्राप्ति में परेशानियों का सामना व्यक्ति को करना पड़ सकता है। इसके साथ ही ज्ञान और आध्यात्मिक क्षेत्र में आगे बढ़ने में भी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। 

शनि अस्त- शनि के अस्त होने से व्यक्ति अनुशासनहीन हो सकता है। गलत कार्यों में लिप्त हो सकता है। साथ ही इनके द्वारा किया गया कार्य किसी की नजर में भी नहीं आता। 

चंद्र अस्त- चंद्रमा के अस्त होने से माता के साथ मनमुटाव और माता के स्वास्थ्य में दिक्कतें आ सकती हैं। इसके साथ ही भावनात्मक रूप से भी ऐसे लोग कमजोर हो सकते हैं।

अस्त ग्रह क्या शुभ परिणाम भी दे सकते हैं?

जी हां, अस्त ग्रह शुभ परिणाम भी दे सकते हैं। अगर अस्त ग्रह 6, 8 या 12 वें भाव में हो तो ये शुभ परिणाम देने में सक्षम होता है। वहीं शुभ ग्रहों की दृष्टि और कुंडली में अस्त ग्रह की अच्छी स्थिति भी व्यक्ति को शुभ फल दे सकती है। वहीं अगर अस्त ग्रह से जुड़े उपाय किए जाएं तो तब भी ये शुभ फल देने में सक्षम हो सकता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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