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Govardhan Puja Bhog 2025: गोवर्धन पूजा में 56 भोग का है विशेष महत्व, जानिए इसमें क्या-क्या चीजें शामिल की जाती हैं

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Oct 21, 2025 11:36 am IST,  Updated : Oct 22, 2025 06:54 am IST

Govardhan Puja Bhog 2025: गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर उसकी विधि विधान पूजा की जाती है। जानिए गोवर्धन पूजा में किन चीजों का भोग लगता है।

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गोवर्धन पूजा 56 भोग Image Source : FREEPIK

Govardhan Puja 56 Bhog: दिवाली के बाद अगला त्योहार गोवर्धन पूजा का होता है। इस दिन प्रात: गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर उसे फूलों से सजाया जाता है। फिर शुभ मुहूर्त में गोवर्धन की विधि विधान पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, फूल, खील, बताशे आदि कई चीजों का प्रयोग किया जाता है। खासतौर से इस पूजा में ओंगा यानी अपामार्ग जरूर रखा जाता है। यहां हम आपको बताएंगे गोवर्धन पूजा के दिन 56 भोग का क्या महत्व होता है और इसमें क्या-क्या चीजें शामिल की जाती हैं। 

गोवर्धन पूजा 56 भोग (Govardhan Puja 56 Bhog)

  1. पंजीरी
  2. मोहनभोग
  3. शक्कर पारा
  4. आलूबुखारा
  5. पापड़
  6. शहद
  7. शिकंजी
  8. माखन-मिश्री
  9. मूंग दाल हलवा
  10. मठरी
  11. किशमिश
  12. खिचड़ी
  13. सफेद-मक्खन
  14. चना
  15. खीर
  16. घेवर
  17. चटनी
  18. पकौड़े
  19. बैंगन की सब्जी
  20. ताजी क्रीम
  21. मीठे चावल
  22. रसगुल्ला
  23. पेड़ा
  24. मुरब्बा
  25. साग
  26. दूधी की सब्जी
  27. कचौरी
  28. भुजिया
  29. जलेबी
  30. काजू-बादाम बर्फी
  31. आम
  32. दही
  33. पूड़ी
  34. रोटी
  35. सुपारी
  36. रबड़ी
  37. पिस्ता बर्फी
  38. केला
  39. चावल
  40. टिक्की
  41. नारियल पानी
  42. सौंफ
  43. जीरा-लड्डू
  44. पंचामृत
  45. अंगूर
  46. कढ़ी
  47. दलिया
  48. बादाम का दूध
  49. पान
  50. मालपुआ
  51. गोघृत
  52. सेब
  53. चीला
  54. देसी घी
  55. छाछ
  56. मेवा

गोवर्धन पूजा में 56 भोग का महत्व 

गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। इस भोग से जुड़ी एक दिलचस्प कथा भी है। कहते हैं माता यशोदा कृष्ण जी को आठ पहर भोजन कराती थीं। जब इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था तो कहते हैं इस दौरान श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक अन्न-जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया था। तब ब्रजवासियों और माता यशोदा ने मिलकर बाल गोपाल के लिए 56 व्यंजन बनाए क्योंकि माता यशोदा कृष्ण जी को आठ पहर भोजन कराती थी तो 7 दिन के हिसाब से 7X8 = 56 व्यंजन हुए। कहते हैं तभी से 56 भोग भगवान कृष्ण का प्रिय माना जाता है। इस भोग में मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा और कसैला हर प्रकार के स्वाद का भोजन शामिल होता है।

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