Hanuman Ashtak Lyrics In Hindi: हनुमान अष्टक (बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों) का पाठ करना बेहद शुभ माना गया है। खासतौर से मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती के दिन इसका पाठ करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। 2 अप्रैल को हनुमान जयंती मनाई जाएगी। ऐसे में इस शुभ अवसर पर हनुमान चालीसा के साथ इस स्तोत्र का पाठ करने से बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त कर सकेंगे। इसका पाठ आप सुबह या शाम कभी भी कर सकते हैं। चलिए जानते हैं इस पाठ के लिरिक्स और इसे करने का तरीका।
संकट मोचन हनुमानाष्टक (Hanuman Ashtak Lyrics)
॥ मत्तगयन्द छन्द ॥
बाल समय रवि भक्षि लियोतब तीनहुं लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग कोयह संकट काहु सों जात न टारो।
देवन आनि करी बिनतीतब छांड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग मेंकपि संकटमोचन नाम तिहारो॥1॥
बालि की त्रास कपीस बसैगिरि जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महा मुनि साप दियोतब चाहिय कौन बिचार बिचारो।
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभुसो तुम दास के सोक निवारो।
को नहिं जानत है जग मेंकपि संकटमोचन नाम तिहारो॥2॥
अंगद के सँग लेन गये सियखोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जुबिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।
हेरि थके तट सिंधु सबैतब लाय सिया-सुधि प्रान उबारो।
को नहिं जानत है जग मेंकपि संकटमोचन नाम तिहारो॥3॥
रावन त्रास दई सिय कोसब राक्षसि सों कहि सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभुजाय महा रजनीचर मारो।
चाहत सीय असोक सों आगि सुदै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।
को नहिं जानत है जग मेंकपि संकटमोचन नाम तिहारो॥4॥
बान लग्यो उर लछिमन केतब प्रान तजे सुत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबैगिरि द्रोन सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दईतब लछिमन के तुम प्रान उबारो।
को नहिं जानत है जग मेंकपि संकटमोचन नाम तिहारो॥5॥
रावन जुद्ध अजान कियो तबनाग कि फाँस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दलमोह भयो यह संकट भारो।
आनि खगेस तबै हनुमान जुबंधन काटि सुत्रास निवारो।
को नहिं जानत है जग मेंकपि संकटमोचन नाम तिहारो॥6॥
बंधु समेत जबै अहिरावनलै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भली बिधि सोंबलि देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।
जाय सहाय भयो तब हीअहिरावन सैन्य समेत सँहारो।
को नहिं जानत है जग मेंकपि संकटमोचन नाम तिहारो॥7॥
काज कियो बड़ देवन के तुमबीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब कोजो तुमसों नहिं जात है टारो।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभुजो कुछ संकट होय हमारो।
को नहिं जानत है जग मेंकपि संकटमोचन नाम तिहारो॥8॥
॥ दोहा ॥
लाल देह लाली लसे,अरू धरि लाल लंगूर।
बज्र देह दानव दलन,जय जय कपि सूर॥
हनुमान अष्टक पाठ विधि और नियम
- हनुमान अष्टक का पाठ वैसे तो आप प्रतिदिन कर सकते हैं। लेकिन अगर रोजाना संभव न हो तो मंगलवार और शनिवार को आप इसका पाठ कर सकते हैं।
- हनुमान अष्टक का पाठ करने से पहले हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
- फिर सिंदूर, लाल पुष्प, चमेली का तेल और प्रसाद भगवान को अर्पित करें।
- फिर हनुमान अष्टक का पाठ करें।
- पाठ के बाद हनुमान जी की आरती करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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