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Adhik Maas Purnima 2026: साल 2026 की ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा क्यों है इतनी खास? जानें सही डेट और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : May 28, 2026 01:27 pm IST,  Updated : May 28, 2026 01:27 pm IST

Adhik Maas Purnima 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान-दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस बार की ज्येष्ठ पूर्णिमा बेहद ही खास मानी जा रही है। तो यहां जानिए इसके पीछे की वजह के बारे में। साथ ही जानिए पूर्णिमा डेट और स्नान-दान मुहूर्त के बारे में भी।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026- India TV Hindi
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 Image Source : MAGNIFIC

Adhik Maas Jyeshtha Purnima 2026: इस बार ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है, जो कि 3 साल में एक बार आता है। अधिक मास को पुरुषोत्तम माह के रूप में भी जाना जाता है। इस माह के स्वामी स्वयं जगत के पालनहार नारायण है।  इस वजह से अधिक मास में आने वाली ज्येष्ठ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अधिक मास में आने की वजह से इस पूर्णिमा को अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा कहेंगे। भगवान विष्णु को समर्पित इस विशेष महीने की पूर्णिमा पर स्नान, दान और पूजा करने से सामान्य पूर्णिमा की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। तो आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का आरंभ 30  मई को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 31 मई को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा 31 मई 2026 को रहेगी। पूर्णिमा का स्नान भी इसी दिन किया जाएगा। जो लोग पूर्णिमा का उपवास रखते हैं वे शनिवार को पूर्णिमा का व्रत रखेंगे। उदयातिथि के अनुसार गंगा स्नान, दान-पुण्य और सत्यनारायण भगवान की कथा रविवार को करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।

अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 स्नान-दान मुहूर्त

अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान के लिए सुबह से लेकर दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक का समय उत्तम रहेगा। लेकिन इसके अलावा जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-दान करना चाहते हैं उनके लिए सुबह 4 बजकर 34 मिनट से सुबह 5 बजकर 17 मिनट तक का समय मिलेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से आरंभ होगा और समाप्त दोपहर 1 बजकर 3 मिनट पर होगा। ये मुहूर्त भी स्नान-दान के लिए अच्छा माना जाता है।

क्यों इतनी खास है ज्येष्ठ पूर्णिमा

अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए इस बार की ज्येष्ठ पूर्णिमा अत्यंत खास मानी जा रही है। इस बार ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है, इसलिए इसे अधिक ज्येष्ठ माह कहा जा रहा है। अधिक मास और पूर्णिमा दोनों में भगवान विष्णु की पूजा का खास महत्व है। पूर्णिमा के दिन नारायण के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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