ज्योतिष और हस्तरेखा शास्त्र अनुसार, हमारी हथेली में रेखाओं के साथ ही विभिन्न ग्रहों के पर्वत भी बने होते हैं। इन पर्वतों को देखकर भी ये आसानी से जाना जा सकता है कि किस व्यक्ति का जीवन कैसा रहेगा। हर व्यक्ति की चाहत होती है कि उसे जीवन में ऊंचा पद और मान-सम्मान की प्राप्ति हो। हथेली में मौजूद ये पर्वत आपकी इसी चाहत से जुड़े कई गहरे राज खोल देते हैं। इन्हें देखकर आप जान सकते हैं कि आपके जीवन में बड़ा अधिकारी बनने के कितने प्रबल योग हैं। चलिए जानते हैं कि हाथ में वो कौन से तीन पर्वत हैं जो आपको सरकारी नौकरी मिलने का संकेत देते हैं।
शनि पर्वत
मध्यमा उंगली के ठीक नीचे वाले स्थान को शनि पर्वत कहा जाता है। कहते हैं यदि यह पर्वत सामान्य से अधिक उभरा हुआ हो और उस पर कोई कटी-फटी रेखा न हो, तो सरकारी नौकरी लगने के प्रबल चांस रहते हैं। ऐसे लोग मेहनती, अनुशासित, धैर्यवान और ईमानदार होते हैं। इस पर्वत का मजबूत होना सरकारी नौकरी में उच्च पद मिलने का संकेत देता है।
गुरु पर्वत
हथेली में शनि पर्वत के साथ ही अगर गुरु पर्वत भी मजबूत है, तो जातक के बड़े अधिकारी बनने के प्रबल योग रहते हैं। हथेली में गुरु पर्वत तर्जनी उंगली के ठीक नीचे होता है। अगर ये स्थान आपका उभरा हुआ है तो समझिए आपकी कुंडली में ज्ञान और समृद्धि के कारक गुरु की स्थिति काफी मजबूत है। कहते हैं जिस व्यक्ति का गुरु पर्वत मजबूत होता है, ऐसे लोगों को सरकारी नौकरी में लाभ मिलता है। यह पर्वत बड़ा प्रशासनिक पद दिलाने में मुख्य भूमिका निभाता है।
सूर्य पर्वत
अनामिका उंगली यानी रिंग फिंगर के ठीक नीचे के भाग को सूर्य पर्वत कहा जाता है। यदि यह स्थान अच्छे से उभरा हुआ है और यहां से एक स्पष्ट सूर्य रेखा निकल रही है तो सरकारी नौकरी, प्रसिद्धि और उच्च पद मिलने के प्रबल योग होते हैं। यदि हथेली में शनि और गुरु के साथ ही सूर्य पर्वत भी मजबूत है, तो व्यक्ति न केवल बड़ा अधिकारी बनता है, बल्कि अपने काम में खूब नाम भी कमाता है।
ज्योतिष अनुसार ये तीनों पर्वत आपके भाग्य को काफी मजबूती प्रदान करते हैं। लेकिन यहां ये भी ध्यान रखना जरूरी है कि भाग्य का साथ भी तभी मिलेगा, जब आप अपने लक्ष्यों को पाने के लिए कड़ी मेहनत के साथ ही निरंतर प्रयास करते रहें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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