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अक्टूबर 2026 में कब है सर्वपितृ अमावस्या? नोट करें सही तिथि, टाइमिंग और श्राद्ध का मुहूर्त

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Oct 09, 2026 08:47 am IST,  Updated : Oct 09, 2026 08:48 am IST

अक्टूबर में सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या मनाई जाएगी। यह पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है और इस दिन के बाद से नवरात्रि पर्व शुरू हो जाता है।

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अक्टूबर अमावस्या 2026 Image Source : CANVA

अक्टूबर 2026 में सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी जिसे महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस अमावस्या पर उन सभी मृतक सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि या चतुर्दशी तिथि पर हुआ हो। इसके अलावा इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध भी किया जा सकता है जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या फिर किसी कारण आप उनकी तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाए हैं। इस अमावस्या के श्राद्ध को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। चलिए जानते हैं अक्टूबर 2026 में यह अमावस्या कब मनाई जाएगी और इस दिन श्राद्ध का मुहूर्त क्या रहेगा।

अक्टूबर 2026 में अमावस्या कब है? (October Amavasya Date 2026)

अक्टूबर में अमावस्या 10 तारीख को यानी शनिवार को मनाई जाएगी। पंचांग अनुसार अमावस्या तिथि अक्टूबर की रात 9 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। 

अक्टूबर 2026 में अमावस्या मुहूर्त (October Amavasya Shradh Muhurat) 

  • कुतुप मूहूर्त - 11:45 AM से 12:31 PM
  • रौहिण मूहूर्त - 12:31 PM से 01:18 PM
  • अपराह्न काल - 01:18 PM से 03:37 PM

अक्टूबर 2026 अमावस्या टाइमिंग (October Amavasya Timings 2026)

  • ब्रह्म मुहूर्त - 04:40 ए एम से 05:29 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या - 05:05 AM से 06:19 AM
  • अभिजित मुहूर्त - 11:45 AM से 12:31 PM
  • विजय मुहूर्त - 02:04 PM से 02:51 PM
  • गोधूलि मुहूर्त - 05:57 PM से 06:22 PM
  • सायाह्न सन्ध्या - 05:57 PM से 07:11 PM
  • अमृत काल - 03:36 PM से 05:14 PM

सर्वपितृ अमावस्या का महत्व

सर्वपितृ अमावस्या का महत्व अन्य श्राद्ध तिथियों से कहीं ज्यादा माना गया है क्योंकि यह खास दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध-तर्पण करने का अवसर देता है जिनकी मृत्यु की तिथि या तो आपको याद न हो या फिर आप किसी कारण उनका श्राद्ध उनकी पुण्य तिथि पर न कर पाए हों। एक तरह से यह दिन किसी एक पूर्वज के लिए नहीं, बल्कि पूरे कुल के सभी मृत सदस्यों के लिए होता है। कहते हैं इस दिन श्राद्ध करने से सभी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है जिससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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